गोबिंदपुर(धनबाद) । BSF जवान रविशंकर की शहादत कोयलांचल के लोग भूल नहीं पा रहे हैं। कल अंतिम यात्रा में उमड़ी हजारों की भीड़ के बाद गोबिन्दपुर में युवाओं ने कैंडल मार्च निकालकर रविशंकर की शहादत को सलाम किया। BSF जवान रविशंकर साव रविवार को ड्यूटी के दौरान एक हादसे का शिकार हो गये थे। ड्यूटी के दौरान करंट की चपेट में आये रविशंकर का पार्थिव शरीर कल सुबह उनके पैतृक घर हिंद नगर पहुंचा था, जहां बीएसएफ जवानों ने पूरे सम्मान के साथ अपने साथी को अंतिम विदाई दी।


इस दौरान हिंद नंगर से खुदिया नदी श्मशान घाट तक शहीद जवान के अंतिम यात्रा में सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान भारत माता की जय….जब तक सूरज चांद रहेगा… शहीद रविशंकर अमर रहे जैसे नारे गूंजते रहे। आज शाम युवाओं ने कैंडल मार्च निकालकर शहादत को सलाम किया। हाथों में मोमबत्ती, और सामने शहीद रविशंकर के नाम का बैनर लिये युवा भारत माता का जयकारा लगा रहे थे।


कैंडल मार्च अलग-अलग रास्तों से गुजरते हुए शहीद रविशंकर के घर पर पहुंचकर खत्म हुई। इस दौरान युवाओं ने रविशंकर की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। युवाओं ने कहा कि देश के लिए कुर्बान होने की मिसाल रविशंकर साव बन गये हैं। उनके बलिदान ने युवाओं को भारतीय सेना के प्रति मान तो बढ़ाया ही है, साथ ही साथ देश सेवा में जाने की प्रेरणा भी जगायी है।


पत्नी लगाती रही भारत माता की जय के नारे

रविशंकर को अपनी विदाई के वक्त कभी आंसू पसंद नहीं थे। छुट्टी से ड्यूटी जाते वक्त भी वो घर में हर किसी को यही बोलता- कोई रोते हुए मुझे विदा मत करना। मैं देश सेवा मं गया हूं, और सैनिक को विदा हमेशा गर्व और खुशी के साथ मिलनी चाहिये। शहीद रविशंकर साव की इन बातों को उनके पिता रामदेव साव और उनकी मां ने गांठ बाध रखा है। कल अंतिम यात्रा के दौरान भी शहीद की पत्नी खामोश जरूर थी, लेकिन पत्थरदिल बनकर आंखों में आंसू नहीं आने दिया। वो भी मौजूद भीड़ के साथ मिलकर नारे लगाते रही। आज भी शहीद की पत्नी ने कैंडल मार्च कर आये युवाओं के साथ नारे लगाये, लेकिन वो रोयी नहीं।

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