‘दो वोट के लिए दो हत्या..’ पूर्व RJD सांसद डबल मर्डर केस में दोषी करार, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला

पटना : RJD के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने साल 1995 के मशरख डबल मर्डर केस में उन्हें दोषी करार दिया है। इसके बाद अब दो सितंबर को उनकी सजा पर बहस होने वाली है. कोर्ट इन्हें सजा सुनाएगी. इससे पहले निचली अदालत में सुनवाई हुई थी. यहां पूर्व सांसद को रिहाई मिली थी. फिर यह मामला हाइकोर्ट में पहुंचा था. यहां निचली अदालत के फैसले को सही माना गया. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा. सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह दोषी करार दिया गया है.
साल 1995 में दो लोगों की हुई थी हत्या
जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 1995 का है. सांसद पर आरोप था कि उन्होंने अपने कहे अनुसार वोट नहीं देने पर छपरा के मसरख इलाके के निवासी की हत्या करा दी थी. साल 1995 में राजेंद्र राय और दारोगा राय की हत्या हुई थी. राजेंद्र राय की उम्र 47 साल थी. वहीं, दारोगा राय की उम्र 18 साल थी. आरजेडी के पूर्व सांसद पर वोट नहीं देने पर हत्या का आरोप था. इसके बाद निचली अदालत में मामला पहुंचा था. यहां सुनवाई हुई और पूर्व सांसद को रिहाई मिल गई थी. हाईकोर्ट में भी यह मामला पहुंचा था. इसके बाद पटना उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को ही सही माना था. वहीं, फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. अब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने की बात कही है। जस्टिस संजय किशन कौल और विक्रम नाथ की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। प्रभुनाथ सिंह को इस मामले में पटना की एक कोर्ट ने साल 2008 में बरी कर दिया था। बाद में साल 2012 में पटना हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया था। पीड़ित के भाई ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
वोट न देने पर 2 की हुई थी हत्या
साल 1995 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान छपरा के मशरख में 18 साल के राजेंद्र राय और 47 साल के दरोगा राय की पोलिंग बूथ के पास ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि दोनों ने ही प्रभुनाथ सिंह के कहे अनुसार वोट नहीं दिया था।
बता दें कि यह वही चुनाव था जिसमें अशोक सिंह ने प्रभुनाथ सिंह को हराया था। इसके बाद प्रभुनाथ सिंह ने 90 दिनों के अंदर अशोक सिंह की हत्या करने की धमकी दी थी। 3 जुलाई, 1995 के दिन अशोक सिंह की हत्या हो गई। यह उनके विधायक बनने का 90वें दिन था ।
प्रभुनाथ सिंह फिलहाल अशोक सिंह हत्याकांड में झारखंड के हजारीबाग केंद्रीय कारा में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।



















