झारखंड विधानसभा में जोरदार हंगामा: विधायक निर्मल महतो को टांगकर ले गये मार्सल, कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सदन गरमाया, सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोंकझोंक

Uproar in Jharkhand Assembly: Marshals drag MLA Nirmal Mahato away, law and order issue heats up the House, and heated exchanges between the ruling party and the opposition.

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। हंगामे के बीच आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो आसन के समक्ष पहुंच गए, जिसके बाद उन्हें मार्शल आउट करना पड़ा। बाद में संसदीय कार्य मंत्री के अनुरोध पर स्पीकर ने उन्हें फिर से सदन में आने की अनुमति दे दी।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। कार्यवाही के दौरान विपक्षी भाजपा विधायकों ने राज्य सरकार को घेरते हुए प्रश्नकाल स्थगित कर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की। इस दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि आजसू विधायक निर्मल महतो को सदन से मार्शल आउट करना पड़ा, जिससे सदन का माहौल और गरमा गया।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि झारखंड में चुनी हुई सरकार नहीं बल्कि “बाबुओं की सरकार” चल रही है। मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं और प्रशासनिक अधिकारी निष्क्रिय बने हुए हैं। श्री मरांडी ने प्रश्नकाल स्थगित कर कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।

इस मुद्दे पर सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष प्रश्नकाल नहीं चलने देने की बात कर रहे हैं, जबकि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में उन्होंने यह मुद्दा नहीं उठाया था।

उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि विपक्ष गंभीर चर्चा नहीं चाहता, बल्कि केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि यदि कहीं भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही के ठोस मामले हैं तो विपक्ष उन्हें सामने लाए, सरकार कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

बहस के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब आजसू विधायक निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो अचानक आसन के सामने पहुंच गए और रिपोर्टिंग टेबल को थपथपाने लगे। इसके बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा और हंगामे के बीच तिवारी महतो को सदन से मार्शल आउट कर दिया गया।

इधर, विपक्षी विधायकों ने जोरदार विरोध जताया और सत्ता पक्ष पर विधायकों को उकसाने का आरोप लगाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों से इस तरह के आचरण की अपेक्षा नहीं की जाती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि रिपोर्टिंग टेबल को पीटना असंसदीय आचरण है और यह सदन की गरिमा के खिलाफ है। स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष से भी अपने विधायक के व्यवहार पर ध्यान देने की बात कही।

इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने निर्मल महतो के व्यवहार की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने तिवारी महतो को उकसाया, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी।

मंत्री सुदिव्य कुमार ने भी कहा कि सरकार की ओर से बार-बार विपक्षी विधायकों से अपनी सीट पर बैठने का अनुरोध किया गया, लेकिन तिवारी महतो का व्यवहार उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों द्वारा इस तरह के आचरण का समर्थन करना भी सही नहीं है।

इस पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के विधायकों के उकसावे के कारण ही ऐसी स्थिति बनी। बहस के दौरान मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विधानसभा सुचारु रूप से चल रही है और इसके लिए स्पीकर धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मेज पटकने से दर्द कम नहीं होता और राजनीति में आचरण का विशेष महत्व होता है।

काफी देर तक चली बहस के बाद संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने स्पीकर से अनुरोध किया कि आजसू विधायक निर्मल महतो को फिर से सदन में आने की अनुमति दी जाए। स्पीकर ने उनके आग्रह को स्वीकार करते हुए निर्मल महतो को सदन में वापस आने की छूट दे दी। इसके बाद मामला शांत हुआ और प्रश्नकाल की कार्यवाही सामान्य रूप से शुरू हो सकी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

close