शिक्षक सहित चार की हत्या: फांसी की सजा जिन दो आरोपियों को मिली थी, हाईकोर्ट ने दोनों को कर दिया बरी, 22 साल पुराने केस में हाईकोर्ट ने ….

Murder of four people including a teacher: The High Court acquitted the two accused who were sentenced to death; in a 22-year-old case, the High Court...

चार लोगों की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाए दो अभियुक्तों को झारखंड हाईकोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं।
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Jharkhand Highcourt News : झारखंड हाईकोर्ट ने कोडरमा जिले में हुए बहुचर्चित चारहरे हत्याकांड मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिन दो आरोपियों को फांसी की सजा दी गयी थी, दोनों आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में प्रस्तुत गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाते और साक्ष्यों में भी कई तरह की विसंगतियां हैं, जिसके कारण संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे में अभियुक्तों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा।

झारखंड हाई कोर्ट की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया है। खंडपीठ में शामिल जस्टिस आर मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन ने दोनों अभियुक्तों की अपील याचिका पर सुनवाई करते हुए फांसी की सजा को निरस्त कर दिया और उन्हें बरी करने का आदेश दिया। फांसी की सजा पाए दोनों अभियुक्तों संजय यादव और रामवृक्ष यादव ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरे मामले के गवाहों के बयान, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया।अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और उनमें कई विरोधाभास हैं। इसके अलावा कुछ गवाहों के बयान पूरी तरह विश्वसनीय नहीं पाए गए।

अदालत ने माना कि ऐसे हालात में अभियुक्तों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उन्हें संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।यह मामला 25 सितंबर 2004 की शाम का है। उस दिन शाम करीब 7:30 बजे सेवानिवृत्त शिक्षक कपिलदेव प्रसाद यादव अपने घर की छत पर बैठकर रेडियो पर समाचार सुन रहे थे।

उसी दौरान लगभग 20 से 25 की संख्या में हथियारबंद अपराधियों ने उनके घर पर हमला कर दिया। हमलावरों ने घर में घुसकर अंधाधुंध हमला किया।इस हमले में कपिलदेव प्रसाद यादव, उनके पुत्र नीरज यादव, पौत्र अनोज कुमार और रिश्तेदार सकलदेव कुमार की मौके पर ही हत्या कर दी गई थी।

घटना के समय कपिलदेव प्रसाद यादव के एक अन्य पुत्र सुरेश कुमार किसी तरह छत से कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहे थे।इस घटना के बाद सुरेश कुमार के आवेदन पर सतगावां थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बताया गया कि घटना के बाद हमलावर “एमसीसी जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए वहां से फरार हो गए थे। मामले में कुल 16 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था।

बाद में सरकार के निर्देश पर मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई। जांच के दौरान आठ आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि आठ लोगों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया।इस मामले के मुख्य अभियुक्त सुनील यादव, जो एमसीसी का एरिया कमांडर बताया गया था, उसे पूर्व में कोडरमा अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

फिलहाल वह जमानत पर बाहर है। वहीं मामले के एक अन्य अभियुक्त दारोगा प्रसाद यादव की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।इसके अलावा रंजीत यादव, विपिन यादव, नवलेश यादव और राजेश प्रसाद यादव अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक विनोद प्रसाद ने 11 गवाहों का परीक्षण कराया था।

निचली अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को जघन्य हत्या की श्रेणी में मानते हुए संजय यादव और रामवृक्ष यादव को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि हाई कोर्ट ने अब गवाहों के बयानों में विरोधाभास को देखते हुए इस सजा को निरस्त करते हुए दोनों अभियुक्तों को बरी कर दिया है।

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