राहुल गांधी के बयान पर मचा तूफान थमा, कोर्ट ने एक झटके में पलटा पूरा खेल, FIR की मांग खारिज
‘हम राज्य से लड़ रहे हैं’ बयान बना था विवाद की जड़, हाईकोर्ट के फैसले ने खत्म किया कानूनी संकट

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली से कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi को उस वक्त बड़ी राहत मिली, जब Allahabad High Court ने उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही लंबे समय से सियासी और कानूनी विवाद में घिरे इस मामले पर फिलहाल विराम लग गया है।
पूरा मामला 15 जनवरी 2025 को दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था कि ‘हम बीजेपी, आरएसएस और खुद भारतीय राज्य से लड़ रहे हैं।’ इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया था। इसे लेकर एक याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि इसे ‘राज्य के खिलाफ’ मानते हुए राहुल गांधी पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया जाए।
यह याचिका हाईकोर्ट की एकल पीठ के सामने सुनवाई के लिए आई। 8 अप्रैल 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिससे सस्पेंस लगातार बना हुआ था। आखिरकार शुक्रवार, 1 मई 2026 को जब फैसला आया, तो कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया और साफ कर दिया कि इस मामले में FIR दर्ज करने का कोई आधार नहीं बनता।
इस फैसले का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि अगर याचिका स्वीकार कर ली जाती, तो राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता था और लंबी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाती। लेकिन अब इस निर्णय के बाद उनके ऊपर मंडरा रहा कानूनी खतरा फिलहाल पूरी तरह टल गया है।
राहुल गांधी के इस बयान को लेकर सियासत भी जमकर गरमाई थी। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया था, जबकि बीजेपी समर्थकों ने इसे देश के खिलाफ बयान करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। ऐसे माहौल में हाईकोर्ट का यह फैसला दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद पर एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है।
अब इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में राहत का माहौल है, वहीं राजनीतिक बहस थमने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। हालांकि, फिलहाल राहुल गांधी बिना किसी कानूनी दबाव के संसद में अपनी भूमिका पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
हाईकोर्ट का यह निर्णय एक बार फिर यह संकेत देता है कि अदालतें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती हैं। फिलहाल यह मामला यहीं खत्म होता नजर आ रहा है, जब तक कि इस फैसले को चुनौती देने के लिए कोई नई अपील दाखिल नहीं की जाती।









