बटाने नदी के तट पर गूंजा ‘शिव शिष्यता’ का मंत्र: औरंगाबाद में भव्य शिव गुरु महोत्सव संपन्न, LIVE VIDEO
The mantra of 'Shiva Discipleship' resonated on the banks of the Batane River: The grand Shiva Guru Festival concluded in Aurangabad.

औरंगाबाद /26.1.26: जिले के रायपुरा में बटाने नदी के किनारे ‘शिव शिष्य हरींद्रानंद फाउंडेशन’ के तत्वावधान में भव्य ‘शिव गुरु महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महादेव शिव के ‘गुरु’ स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाना और प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से शिव की शिष्यता से जोड़ना था।
शिव केवल नाम के नहीं, काम के गुरु हैं: दीदी बरखा आनंद
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता दीदी बरखा आनंद ने साहब श्री हरींद्रानंद जी के संदेश को साझा करते हुए कहा कि भगवान शिव केवल नाम के नहीं, अपितु काम के गुरु हैं। उन्होंने समाज का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जब हम शिव के ‘औढरदानी’ स्वरूप से धन, धान्य और संतान की कामना करते हैं, तो उनके ‘गुरु’ स्वरूप से ज्ञान प्राप्त क्यों नहीं करते? ज्ञान के अभाव में किसी भी संपत्ति का उपयोग घातक हो सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिव ‘जगतगुरु’ हैं, इसलिए किसी भी धर्म, जाति, लिंग या संप्रदाय का व्यक्ति उन्हें अपना गुरु बना सकता है। शिव का शिष्य बनने के लिए किसी भी पारंपरिक औपचारिकता या दीक्षा की आवश्यकता नहीं है; केवल यह अटूट भाव कि “शिव मेरे गुरु हैं”, शिष्यता की शुरुआत के लिए पर्याप्त है।
शिव शिष्यता का इतिहास और विस्तार
कार्यक्रम में बताया गया कि साहब श्री हरींद्रानंद जी ने सन् 1974 में भगवान शिव को अपना गुरु माना था। 1980 के दशक तक यह अवधारणा पूरे भारत में फैल गई। साहब श्री हरींद्रानंद जी और उनकी धर्मपत्नी दीदी नीलम आनंद जी ने जीवनभर जाति-पाति और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता को शिव के गुरु स्वरूप से जोड़ने का आह्वान किया।
शिष्यता के तीन सरल सूत्र
भैया अर्चित आनंद और अन्य वक्ताओं (शिव कुमार विश्वकर्मा, सोमेंद्र कुमार झा) ने बताया कि शिव का शिष्य बनने के लिए मात्र तीन सूत्र ही सहायक हैं, जिनमें किसी भी प्रकार के अंधविश्वास या आडंबर के लिए कोई स्थान नहीं है:
- प्रथम सूत्र (दया): अपने गुरु शिव से मन ही मन प्रार्थना करना— “हे शिव! आप मेरे गुरु हैं, मैं आपका शिष्य हूँ, मुझ शिष्य पर दया करें।”
- द्वितीय सूत्र (चर्चा): दूसरों को यह बताना और समझाना कि शिव गुरु हैं, ताकि वे भी उनसे जुड़ सकें।
- तृतीय सूत्र (प्रणाम): अपने गुरु शिव को मन ही मन प्रणाम करना। इसके लिए ‘नमः शिवाय’ मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है।
इस महोत्सव में आस-पास के क्षेत्रों से लाखों की संख्या में शिव शिष्यों ने भाग लिया। वक्ताओं ने जोर दिया कि “शिव गुरु हैं” यह तथ्य प्राचीन है, जिसे हमारे शास्त्रों और मनीषियों ने भी स्वीकार किया है।







