खबर का असर: HPBL न्यूज की खबर के बाद मचा हड़कंप, सिविल सर्जन ने ANM/स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन रोकने का फरमान लिया वापस, पढ़िये फरमान क्यों लेना पड़ा वापस

रांची/धनबाद। HPBL न्यूज का बड़ा असर हुआ है। ANM और स्वास्थ्यकर्मियों के वेतन रोकने के अपने तुगलकी फरमान को सिविल सर्जन ने वापस ले लिया है। HPBL न्यूज ने 21 अगस्त को जारी आदेश के संदर्भ में एक खबर किस काम के ये चिकित्सक और CHO…..! ANM और कर्मी संभाल रहे स्वास्थ्य व्यवस्था…सिविल सर्जन के पत्र ने की पुष्टि, उपायुक्त के आदेश पर मचा बवाल हेडलाइंस से खबर पोस्ट की थी। इस खबर को लेकर रांची मुख्यालय स्थित आला अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया था, वहीं कर्मचारी संगठनों ने भी विरोध की रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी थी।

स्वास्थ्यकर्मियों की नाराजगी की खबर सामने आने अब सिविल सर्जन ने अपना आदेश वापस ले लिया है। भले ही आदेश में दुर्गापूजा और त्योहारी महीनों का हवाला दिया गया हो, लेकिन हकीकत ये है कि स्वास्थ्यकर्मियों की नाराजगी के बाद सिविल सर्जन को फैसले पर यू टर्न लेना पड़ा है।

किस काम के ये चिकित्सक और CHO…..! ANM और कर्मी संभाल रही स्वास्थ्य व्यवस्था…सिविल सर्जन के पत्र ने की पुष्टि, उपायुक्त के आदेश पर मचा बवाल

क्या है पूरा मामला

स्वास्थ्य विभाग में अपनी नाकामी का ठिकरा दूसरों के सर पर फोड़ने की पुरानी फितरत रही है। लिहाजा हर बार विभागीय बैठकों में जब स्वास्थ्य विभाग की नाकामी के लिए अफसरों को फटकार लगती है, तो वो बलि का बकरा या तो एएनएम को बना देते हैं या स्वास्थ्य कर्मियों को… ये एक बार नहीं, अनेकों बार हो चुका है,जबकि जिला में अधिकारियों की जंबो टीम है। नया मामला 21 अगस्त को सामने आया, जब धनबाद के सिविल सर्जन ने एक फरमान जारी किया, जिसमें ये कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव लक्ष्य की तुलना में काफी कम है, इसलिए एएनएम और कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगायी जाती है।

उपायुक्त ने जतायी थी नाराजगी

दरअसल 20 अगस्त को उपायुक्त धनबाद ने स्वास्थ्य विभाग की रिव्यू मीटिंग ली थी। इस दौरान संस्थागत प्रसव के खराब आंकड़ों को लेकर उन्होंने काफी नाराजगी जतायी थी। मीटिंग में उपायुक्त की नाराजगी झेलने के बाद सिविल सर्जन ने अगले ही दिन सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पत्र भेजकर ये आदेश जारी कर दिया कि जब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 50 प्रतिशत संस्थागत प्रसव नहीं होता, तब तक एएनएम व कर्मियों के वेतन पर रोक रहेगी।

सिविल सर्जन ने फैसले पर लिया यू टर्न

सिविल सर्जन के इस आदेश को जिले भर से कई स्वास्थ्यकर्मियों ने HPBL न्यूज को भेजकर अपनी आपत्ति जतायी। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों कें संगठनों की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आ रही थी, जिसके बाद 21 अगस्त के इस आदेश को संदर्भ देते हुए HPBL न्यूज ने खबर किस काम के ये चिकित्सक और CHO…..! ANM और कर्मी संभाल रहे स्वास्थ्य व्यवस्था…सिविल सर्जन के पत्र ने की पुष्टि, उपायुक्त के आदेश पर मचा बवाल खबर पोस्ट की। खबर पर अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया। जिसके बाद 28 अगस्त को सिविल सर्जन कार्यालय ने आदेश जारी अपने 21 अगस्त के आदेश को निरस्त कर दिया। सिविल सर्जन ने अपने आदेश में कहा कि दुर्गापूजा, कर्मापूजा पर्क के मद्देनजर अवरुद्ध वेतनादि भुगतान की स्वीकृति प्रदान की जाती है।

सिविल सर्जन का आदेश अभी भी सवालों में…

आदेश पर इसलिए स्वास्थ्यकर्मियों की आपत्ति थी, क्योंकि कार्रवाई का आदेश सिर्फ एएनएम और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ था। जबकि डाक्टरों और CHO को पूरी तरह क्लीन चिट मिली हुई थी। ऐसा कैसे संभव हो सकता है, कि जिस संस्थान में काम लक्ष्य के अनुरूप ना हो, वहां के जिम्मेदार निचले स्तर के कर्मचारी हो, वहां के चिकित्सक और पदाधिकारियों की क्या कोई जिम्मेदारी नहीं होती?

सवाल ये भी है कि अगर एएनएम और स्वास्थ्यकर्मियों का वेतन रोकने का आदेश दिया गया था, तो फिर चिकित्सा पदाधिकारी और CHO को क्यों छोड़ा गया? क्या इस नाकामी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। जबकि हकीकत तो ये है कि जब भी ऐसी कोई नाकामी सामने आती है, तो सबसे पहले अधिकारियों पर ही कार्रवाई की जाती है, ताकि वो अपने अधिनस्थों से कड़ाईपूर्वक काम करा सकें। संस्थागत प्रसव में क्या संस्था प्रमुख की कोई जिम्मेदारी नहीं होती? खैर फिलहाल आदेश वापस लेकर पनप रहे विवादों को तो सिविल सर्जन ने जरूर शांत करने की कोशिश की है, लेकिन हकीकत में सवाल अभी भी बना हुआ है।

CHO क्यों नहीं कराती प्रसव

सूत्रों की मानें तो सरकार हर दिन CHO को प्रशिक्षण देकर ज्यादा से ज्यादा दक्ष कर रही है ताकि गर्भवती माता सहित अन्य मरीजों को लाभ मिल सके। 24×7 संस्थान में रहकर सुविधा देनी है। परंतु किसी भी HWC में प्रसव नहीं कराया जा रहा है। CHO को मिलने वाली इंसेंटिव में भी कार्यालय की खूब मिलीभगत है।ANM के कार्यों पर ही CHO अपनी उपलब्धि गिनाती है।

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