नौकरी छिनते ही टूट गया सपना… फिर चाय के ठेले ने बदल दी किस्मत! अब अमेरिका में 780 रुपये की चाय बेचकर छाया ‘बिहारी चायवाला’
दाल की बोरियों के नीचे सोने वाला लड़का बना इंटरनेट सेंसेशन — IIT, कॉरपोरेट नौकरी और छंटनी के बाद अमेरिका में शुरू किया अनोखा चाय का कारोबार

कभी दाल की बोरियों के नीचे ठंड से बचकर सोने वाला एक लड़का आज अमेरिका में चाय बेचकर सोशल मीडिया पर छा गया है। बिहार के छोटे से कस्बे बरह से निकलकर अमेरिका तक का सफर तय करने वाले प्रभाकर प्रसाद इन दिनों इंटरनेट पर ‘बिहारी चायवाला’ के नाम से सुर्खियों में हैं।
हाल ही में उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें वह अमेरिका के लॉस एंजिलिस की सड़कों पर करीब 8 डॉलर यानी लगभग 780 रुपये की चाय बेचते नजर आ रहे हैं। उनकी चाय ही नहीं, बल्कि संघर्ष से भरी उनकी कहानी भी लोगों को काफी प्रभावित कर रही है।
प्रभाकर प्रसाद का बचपन बेहद गरीबी में बीता। उन्होंने बताया कि कई बार उनके परिवार के पास कंबल खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। ठंड से बचने के लिए उन्हें और उनके परिवार को दाल की बोरियों के नीचे सोना पड़ता था। इसी दौरान एक घटना के बाद उनका परिवार बिहार छोड़कर भोपाल आ गया, जहां उन्होंने नई जिंदगी की शुरुआत की।
भोपाल में पढ़ाई के दौरान अंग्रेजी माध्यम स्कूल में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। भाषा और माहौल की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। इसी मेहनत का नतीजा था कि उन्होंने आईआईटी की परीक्षा पास कर ली और आगे की पढ़ाई पूरी करने के बाद कॉरपोरेट सेक्टर में नौकरी भी हासिल की।
कुछ समय बाद प्रभाकर अपने सपनों को नया आकार देने के लिए मुंबई चले गए, जहां उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में भी किस्मत आजमाई। इसके बाद उनका सफर अमेरिका तक पहुंचा। वहां उन्होंने एमबीए किया और कई सालों तक कॉरपोरेट सेक्टर में काम किया।
लेकिन साल 2025 में टेक सेक्टर में आई बड़ी छंटनी ने उनकी जिंदगी को अचानक बदल दिया। नौकरी छूटने के बाद उनके सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि अब आगे क्या किया जाए।
इस मुश्किल वक्त में प्रभाकर ने हार मानने के बजाय एक नया रास्ता चुना। उन्होंने लॉस एंजिलिस में भारतीय स्टाइल की चाय बेचने का छोटा सा स्टॉल शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनकी चाय और उनकी कहानी दोनों ही लोगों के बीच लोकप्रिय होने लगीं।
आज सोशल मीडिया पर लोग उन्हें ‘बिहारी चायवाला’ के नाम से जानते हैं। उनके वीडियो लाखों लोग देख रहे हैं और उनकी संघर्ष भरी कहानी लोगों को प्रेरित भी कर रही है।
प्रभाकर कहते हैं कि दाल की बोरियों के नीचे सोने से लेकर अमेरिका में चाय बेचने तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। लेकिन आज जब लोग उनकी चाय पीते हैं और उनकी कहानी सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि जिंदगी ने उन्हें एक नई पहचान दे दी है। अब ‘चाय गाइ’ बनकर उन्हें सुकून मिलता है।









