शिक्षकों के खिलाफ सबसे बड़ी जांच: 7200 से ज्यादा शिक्षकों की होगी जांच, राज्य सरकार ने जांच एजेंसी को सौंपा जांच का जिम्मा, लापरवाही पर तुरंत होगी बर्खास्तगी

Largest ever investigation against teachers: Over 7,200 teachers will be investigated; state government has assigned investigation to an investigative agency; negligence will result in immediate dismissal.

School Education News : शिक्षकों के खिलाफ सबसे बड़ी जांच शिक्षा विभाग करने जा रहा है। इस संबंध में दिशा निर्देश जारी कर दी गयी है। फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी की शिकायत मिलने पर विभाग ने ये कवायद शुरू की है। बताया जा रहा है कि 72 हजार से अधिक शिक्षकों के शैक्षणिक, प्रशिक्षण और जाति प्रमाण पत्रों की जांच की जायेगी। राज्य सरकार ने जाच का जिम्मा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को दिया है।

 

निर्देश के मुताबिक राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 72,287 शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की गहन जांच कराई जाएगी। इस बार जांच की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) को सौंपी है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और निर्धारित योग्यता से जुड़े सभी कागजात शामिल होंगे।

 

बताया जा रह है कि किसी भी शिक्षक का प्रमाण पत्र फर्जी या गलत पाया जाता है, तो उसकी सेवा तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। इतना ही नहीं, नौकरी के दौरान ली गई पूरी सैलरी और अन्य सरकारी लाभों की राशि ब्याज सहित वसूली जाएगी और संबंधित शिक्षक पर धोखाधड़ी का आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो वर्ष 2006 से 2015 के बीच नियुक्त नियोजित शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच करेगा।

 

शिक्षा विभाग की प्रारंभिक पड़ताल में यह सामने आया है कि सबसे अधिक गड़बड़ी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के प्रमाण पत्रों में है। करीब 53,894 शिक्षकों की मैट्रिक और इंटर की मार्कशीट और प्रमाण पत्र संदिग्ध माने गए हैं। वहीं, शेष 18,393 शिक्षकों के बीएड, बीटीसी, बीए, जाति और दिव्यांगता सहित अन्य प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी।

 

जांच में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के 46,681 प्रमाण पत्र शामिल हैं। इसके अलावा संस्कृत बोर्ड के 1,763 और मदरसा बोर्ड के 5,450 प्रमाण पत्र भी निगरानी के रडार पर हैं। विश्वविद्यालयों की बात करें तो तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के 666, मगध विश्वविद्यालय बोधगया के 4,924, नालंदा खुला विश्वविद्यालय पटना के 114, पटना विश्वविद्यालय के 383 और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के 2,296 प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच होगी।

 

वहीं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा के 2,934, दूरस्थ शिक्षा से जुड़े 882 और कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा के 395 प्रमाण पत्र भी जांच सूची में हैं। जयप्रकाश विश्वविद्यालय छपरा के 395 और बीआर अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के 1,902 प्रमाण पत्र भी संदिग्ध पाए गए हैं, जबकि बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के करीब 2,000 प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी।

 

गौरतलब है कि शिक्षा विभाग अब तक सात बार विभागीय स्तर पर इस मामले की जांच कर चुका है, लेकिन हर बार प्रक्रिया अधूरी रह गई। कई बार जाति और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों पर सवाल उठे, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। अब सरकार ने साफ कर दिया है कि निगरानी ब्यूरो की जांच के बाद किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

 

चिंता की बात यह भी है कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर 40 हजार से अधिक शिक्षक सक्षमता परीक्षा और टीआरई-1, 2 और 3 पास कर राज्यकर्मी बन चुके हैं। ऐसे शिक्षकों के रिकॉर्ड भी जिलों से मंगाए जा रहे हैं। यदि इनमें से कोई भी शिक्षक फर्जी पाया गया, तो उसकी नौकरी समाप्त होने के साथ-साथ अब तक की पूरी कमाई की रिकवरी की जाएगी।

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