रंग नहीं, चिता की राख उड़ती है यहां…मसान होली का रहस्य..जहां भस्म से खेलते हैं भक्त..

होली का नाम आते ही रंग, गुलाल और खुशियों की तस्वीर उभरती है। लेकिन वाराणसी यानी काशी में एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है, जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलती। यहां श्मशान घाट पर खेली जाती है ‘मसान होली’—जहां रंगों की जगह चिता की भस्म उड़ाई जाती है और माहौल रहस्यमय होने के साथ-साथ गहरे आध्यात्मिक भाव से भरा होता है।

इसे राख में छिपा जीवन का संदेश माना जाता है। आखिर क्या है इस अनोखी परंपरा का रहस्य? और इसका भगवान शिव से क्या संबंध है? आइए जानते हैं…

 क्या है पौराणिक मान्यता?

धार्मिक कथा के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी आए थे। उस दिन देवताओं के साथ गुलाल से होली खेली गई।

लेकिन शिव के गण—भूत, प्रेत और अघोरी—उस उत्सव में शामिल नहीं हो पाए। कहा जाता है कि अपने इन प्रिय भक्तों को प्रसन्न करने के लिए शिव ने अगले दिन श्मशान में भस्म से होली खेली। तभी से काशी में मसान होली की परंपरा चली आ रही है।

 कब मनाई जाती है मसान होली?

काशी की मसान होली, मुख्य होली से पहले रंगभरी एकादशी के अगले दिन मनाई जाती है।
साल 2026 में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को है, इसलिए 28 फरवरी को मसान होली का आयोजन होगा।

 कहां खेली जाती है राख की होली?

सदियों से इस अनोखे आयोजन के दो मुख्य केंद्र रहे हैं:

  • मणिकर्णिका घाट

  • हरिश्चंद्र घाट

मणिकर्णिका घाट पर महाश्मशान नाथ मंदिर से शुरुआत होती है। विशेष पूजा-अर्चना और आरती के बाद भस्म से होली खेली जाती है।

 कैसा होता है नज़ारा?

सुबह से ही घाटों पर भीड़ जुटने लगती है। डमरू की ध्वनि गूंजती है, “हर हर महादेव” के जयकारे लगते हैं।

एक ओर चिताएं जल रही होती हैं, दूसरी ओर भक्त नृत्य करते हुए एक-दूसरे पर राख डालते हैं। यह दृश्य सामान्य होली से बिल्कुल अलग है—यहां उत्सव और विरक्ति साथ दिखाई देते हैं।

रंगों की जगह भस्म, बेलपत्र और धतूरा का महत्व होता है। शिव का अघोर स्वरूप यहां प्रत्यक्ष महसूस होता है।

 क्या है मसान होली का संदेश?

काशी को मोक्ष की नगरी कहा जाता है। यहां मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि शिव में लय माना जाता है। मसान होली यही सिखाती है कि यह शरीर नश्वर है—अंत में सब राख हो जाना है।

इसलिए अहंकार और मोह छोड़कर भक्ति और वैराग्य का मार्ग अपनाना चाहिए।

यह सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु के सत्य का साक्षात्कार है।

 जाने से पहले जान लें…

मसान होली पर्यटन से अधिक एक आध्यात्मिक अनुभव है। यहां अनुशासन और श्मशान की गरिमा बनाए रखना हर आगंतुक की जिम्मेदारी है।

यह आयोजन हर किसी के लिए नहीं—यह उन लोगों के लिए है, जो जीवन के अंतिम सत्य को करीब से महसूस करना चाहते हैं।

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