सुप्रीम कोर्ट ने लगाया UGC नियमों पर रोक: राजनीतिक प्रतिक्रियाओं ने उठाया गरमाई सवालों का तूफ़ान

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे, राजनीतिक दलों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी नियमों पर रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। विपक्ष और सत्ता दोनों के नेताओं ने इसे स्वागतयोग्य बताया, वहीं सामाजिक संतुलन और न्याय को लेकर बहस भी तेज़ हुई है।

कवि और लेखक कुमार विश्वास ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा, “भारत इस समय किसी भी प्रकार के विभाजन को सहन नहीं कर सकता। राजनीतिज्ञों को चाहिए कि वे राजनीति में कोई विभाजक रेखा न खींचें।” उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक हजार वर्षों में जो असमानताएं आईं, उन्हें सुधारने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन कोई निर्दोष व्यक्ति प्रभावित न हो।

बीजेपी विधायक पंकज सिंह ने इसे “स्वागत योग्य और संवेदनशील फैसला” बताया। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने लाखों लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी अदालत के फैसले का समर्थन किया और कहा, “सच्चे न्याय में किसी के साथ अन्याय शामिल नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने यही सुनिश्चित किया है।”

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी नए नियमों के कारण बढ़ते सामाजिक तनाव को देखते हुए फैसले को उचित बताया। उन्होंने कहा कि UGC को नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लेना चाहिए था और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी सुनिश्चित करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप केवल कानून की दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और न्याय की भावना के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। अब सवाल उठता है कि क्या विश्वविद्यालयों में नए नियमों को संशोधित किया जाएगा या सुप्रीम कोर्ट की रोक स्थायी होगी।

देशभर के विद्यार्थी, शिक्षक और राजनीतिक दल इस फैसले की गहरी छाया में भविष्य की दिशा पर निगाह गढ़ाए हुए हैं।

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