नयी दिल्ली 11 मई 2022। राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर सुप्रीम कर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहै ही कि पुनर्विचार तक राजद्रोह कानून का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जायेगा। राजद्रोह कानून यानि 124 A के तहत फिलहाल कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जायेगा। कोर्ट ने लंबित मामलों को भी यथास्थिति बनाये रखने के निर्देश दिये हैं। हालांकि कोर्ट ने उन लोगों को राहत दी है कि जो राजद्रोह के मामले में जेल में बंद है। राजद्रोह के केस में जेल में बंद आरोपी जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।


तीन जजों की बेंच राजद्रोह की बैधता पर सुनवाई कर रही है। इस बैंच में चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली शामिल है। सुप्रीम कोर्ट में आज राजद्रोह कानून में संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाले वाली याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि इस कानून में पुनर्विचार तक कोई नया केस दर्ज नहीं किया जाये। केंद्र की तरफ से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र ने राज्यों को जारी करने वाला मसौदा तैयार किया है। राज्यों को इसके तहत स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि बिना एसपी या उससे ऊंपर के अधिकारियों के मंजूरी के राजद्रोह का धाराओं में एफआईआर दर्ज नहीं होगी। सालिसिटर जनलर ने कहा कि फिलहाल कानून पर रोक ना लगायी जाये।
सालिसिटर जनरल ने ये भी बताया कि राजद्रोह का मामला दर्ज करने से पहले पुलिस अफसरों को प्रर्याप्त कारण भी बताना होगा। उन्होंने बताया कि ये जमानती धारा है। लंबित मामलों को गंभीरता का विश्लेषण करना संभव नहीं है। ऐसे में इस रोक लगाना उचित नहीं होगा। याचिका की पैरवी करते हुए कपिल सिब्बल ने तत्काल इस कानून पर रोक लगाने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बताया गया कि राजद्रोह के कानून का दुरूपयोग हो रहा है, जिस पर नियंत्रण जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार ने कानून पर पुनर्विचार की बात कही है। ऐसे में जब तक राजद्रोह के कानून पर पुनर्विचार नहीं हो जाता, तब तक राजद्रोह के तहत कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जायेगा। साथ ही लंबित प्रकरणों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जायेगी।

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