7 दिन से लापता श्रद्धा लौटी…लेकिन प्यार सार्थक से किया और दुल्हन बनी करणदीप की…जब वी मेट की रियल लाइफ कहानी…
7 दिनों से गायब श्रद्धा की कहानी तो फिल्मी निकली ! प्यार था सार्थक से लौटी तो करण की 'दुल्हन' बनकर

इंदौर की 23 वर्षीय श्रद्धा तिवारी पिछले 7 दिनों से लापता थी। जब परिवार ने तलाश थक हारकर 51,000 रुपये के इनाम की घोषणा कर दी, तब आई एक कॉल ने पूरी कहानी पलट दी।
शुरुआत हुई सार्थक से प्यार और घर से भागकर शादी के इरादे से… लेकिन जब स्टेशन पर सार्थक आया ही नहीं, श्रद्धा ने बिना कुछ सोचे-समझे एक ट्रेन पकड़ ली और पहुंच गई रतलाम।
रतलाम स्टेशन बना किस्मत का मोड़
रतलाम स्टेशन पर अकेली बैठी श्रद्धा की जिंदगी में एंट्री हुई करणदीप की — जो इंदौर में उसके कॉलेज में इलेक्ट्रीशियन का काम करता है। करणदीप ने जब पूरी कहानी सुनी, तो पहले समझाया, फिर जब श्रद्धा नहीं मानी तो उसने शादी का प्रस्ताव रखा।
हालात और इमोशन ऐसे बने कि श्रद्धा ने हां कह दी… और दोनों ने महेश्वर-मंडलेश्वर में शादी कर ली।
बाप की एक कॉल और 500 रुपए ने लौटाया घर
शादी के बाद दोनों मंदसौर पहुंचे, वहीं से श्रद्धा ने अपने पिता को कॉल किया। पिता ने बेटी की आवाज़ सुनी तो राहत की सांस ली, 500 रुपये ट्रांसफर किए ताकि वो ट्रेन पकड़कर इंदौर लौट आएं।
10 दिनों की ‘परीक्षा’ के बाद तय होगी शादी की मंजूरी
फिलहाल श्रद्धा और करण इंदौर लौट चुके हैं और MIG थाने में बयान दर्ज करा चुके हैं। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।
श्रद्धा के पिता ने साफ कहा —
“अब श्रद्धा और करण को 10 दिनों तक अलग रखा जाएगा। अगर उसके बाद भी श्रद्धा कहती है कि वो करण के साथ रहना चाहती है, तो हम इस शादी को स्वीकार कर लेंगे।”
हालांकि पिता को चिंता है कि करण के पास स्थाई नौकरी नहीं है, तो वह बेटी को भविष्य में कैसे संभालेगा?
सार्थक क्यों नहीं आया स्टेशन पर?
पुलिस पूछताछ में पता चला कि श्रद्धा और सार्थक के बीच झगड़ा हो गया था, इसलिए सार्थक स्टेशन पर नहीं पहुंचा। और यहीं से शुरू हुई उस फिल्मी कहानी की असली स्क्रिप्ट, जिसमें नायक कोई पुराना प्रेमी नहीं, बल्कि एक अनजान मुसाफिर बन गया।