झारखंड- 5 जिलों को शो कॉज: हॉस्पीटल संचालन व रखरखाव में सबसे कम खर्च करने वाले पांच जिलों पर गिरेगी गाज, ACS की बैठक में नोटिस जारी करने का निर्देश, कार्रवाई भी होगी

Jharkhand – Show cause for 5 districts: Five districts with the lowest hospital operation and maintenance expenditure will face action. ACS meeting directed to issue notices, and action will also be taken.

रांची। झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की हाईलेवल मीटिंग हुई। बैठक में मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना, 15वें वित्त आयोग, टीबी मुक्त भारत अभियान, एनएचएम और ड्रग्स एंड डायग्नोस्टिक्स सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं की समीक्षा की गयी। अपर मुख्य सचिव ने कम खर्च करने वाले जिलों पर सख्ती और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।



 

विभागीय सभागार से सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य राज्य में संचालित प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति, वित्तीय व्यय और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की स्थिति का आकलन करना था।

 

बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के प्रबंध निदेशक शशि प्रकाश झा, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी जिलों के सिविल सर्जनों ने अपने-अपने जिलों की स्थिति से अवगत कराया।

 

मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी जिलों में योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि कुछ जिलों में इस योजना के तहत अब तक बहुत कम राशि खर्च की गई है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

 

ऐसे पांच जिलों को चिन्हित किया गया है, जहां खर्च सबसे कम रहा है। इन जिलों को शोकॉज नोटिस जारी करने का आदेश देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।15वें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त राशि की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने इसके प्रभावी और समयबद्ध उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने जिलों में उपायुक्त या उप विकास आयुक्त के साथ बैठक कर योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करें और रिपोर्ट को तत्काल अपडेट करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सात दिनों के भीतर कम से कम 50 प्रतिशत राशि खर्च हो जानी चाहिए और माह के अंत तक उपलब्ध कराई गई राशि का न्यूनतम 50 प्रतिशत व्यय अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। ऐसा न करने वाले जिलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

 

टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने जरूरत के अनुसार हैंड होल्ड एक्स-रे मशीनों की खरीद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस अभियान में संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से भी मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।

एनएचएम के तहत चल रहे एक माह के विशेष कार्यक्रम में सभी जरूरतमंदों की टीबी स्क्रीनिंग कराने पर विशेष जोर दिया गया। जिन जिलों में स्क्रीनिंग का स्तर कम पाया गया, वहां तत्काल अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए।

 

एनएचएम की समीक्षा के दौरान अपर मुख्य सचिव ने रिक्त पदों पर शीघ्र बहाली के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां बहाली की प्रक्रिया चल रही है, उसे जल्द से जल्द पूरा कर रिपोर्ट अपडेट की जाए, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

 

ड्रग्स एंड डायग्नोस्टिक्स की समीक्षा में जिलावार दवाओं की उपलब्धता का आकलन करने, हर स्तर पर दवा की खरीद सुनिश्चित करने और दो दिनों के भीतर संबंधित पोर्टल पर एंट्री करने का निर्देश दिया गया। दवा आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी को गंभीरता से लेने की बात कही गई।आउटसोर्स बहाली के विषय पर अपर सचिव ने संबंधित एजेंसियों के साथ किए गए एग्रीमेंट की समीक्षा करने के निर्देश दिए। यदि कोई एग्रीमेंट अत्यधिक पुराना पाया जाता है तो उसे रिप्लेस करने को कहा गया।

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