World War 3 का साया? मिडिल ईस्ट में महाविस्फोट के बीच एक्शन में पीएम मोदी, खाड़ी देशों से हाई-लेवल कॉल
मिसाइलों की गूंज के बीच दिल्ली की कूटनीति तेज… 97 लाख भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस, क्या भारत बनेगा ‘शांति का सेतु’?

मिडिल ईस्ट में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब वैश्विक संकट का रूप लेता दिख रहा है। मिसाइल हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और सैन्य ठिकानों पर बमबारी के बीच दुनिया में तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
इसी बीच भारत ने कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खाड़ी देशों के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर हालात पर गंभीर मंथन किया है।
UAE, बहरीन और सऊदी नेतृत्व से सीधी बातWorld War 3
पीएम मोदी ने
Hamad bin Isa Al Khalifa (बहरीन के राजा)
Mohammed bin Salman (सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस)
से टेलीफोन पर बातचीत की। चर्चाओं में इन देशों की सुरक्षा स्थिति और वहां रह रहे भारतीय समुदाय की भलाई प्रमुख मुद्दा रहा।
सरकार के अनुसार, मिडिल ईस्ट में करीब 9.7 मिलियन भारतीय रहते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्र सरकार ने आपातकालीन योजनाएं सक्रिय कर दी हैं और हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
ईरान के मिसाइल हमले, अमेरिकी बेस निशाने परWorld War 3
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने बहरीन, इराक, यूएई और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
वहीं Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के 1000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया। शुरुआती 30 घंटों में 2000 से ज्यादा बम गिराए जाने का दावा है।
बताया जा रहा है कि इस संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने की खबर है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से कई छात्राओं की जान जाने की सूचना ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।
28 फरवरी से शुरू हुआ महाघमासान
28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग के पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद हालात और विस्फोटक हो गए। रविवार को तीन अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई।
लगातार हो रहे हमलों ने पूरे मिडिल ईस्ट को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।
क्या भारत रोकेगा महायुद्ध?
भारत पर सीधा दबाव इसलिए भी है क्योंकि खाड़ी देशों से उसका गहरा आर्थिक और रणनीतिक संबंध है। तेल आपूर्ति से लेकर प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा तक, हर मोर्चे पर संतुलन साधना बड़ी चुनौती है।
प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय कूटनीति इस बात का संकेत है कि भारत क्षेत्रीय शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।
आगे क्या?World War 3
मिसाइलों की आवाज, जलते सैन्य अड्डे और डरे हुए नागरिक…
दुनिया की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव सीमित रहेगा या सच में “World War 3” की आशंका हकीकत में बदलेगी?









