एलडीएफ की करारी हार के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, पांच दशकों में पहली बार देश में कहीं भी नहीं बची वाम सरकार

तिरुवनंतपुरम।
केरल की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही उनका करीब एक दशक लंबा कार्यकाल समाप्त हो गया और राज्य की सत्ता से वामपंथी सरकार की विदाई हो गई।
राजभवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि, नई सरकार के गठन तक विजयन को कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया है।
यूडीएफ की जबरदस्त वापसी
इस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा को सत्ता से बेदखल कर दिया। 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ ने 102 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ को महज 35 सीटों से संतोष करना पड़ा।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने भी राज्य में तीन सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और विधानसभा में खाता खोलने में सफल रही।
पांच दशक की परंपरा टूटी
एलडीएफ की हार सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह पहली बार है जब पिछले लगभग 50 वर्षों में देश के किसी भी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार नहीं बची है।
केरल वही राज्य है, जहां 1957 में पहली बार वामपंथी सरकार बनी थी। ईएमएस नंबूदिरीपाद के नेतृत्व में शुरू हुआ यह राजनीतिक सफर अब एक बड़े मोड़ पर आकर थम गया है।
क्या खत्म हो गया वामपंथ का दौर?
एक समय देश की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले वाम दल अब लगातार कमजोर होते नजर आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 34 साल तक सत्ता में रहने वाली वाम सरकार पहले ही सत्ता से बाहर हो चुकी थी, और अब केरल में भी हार ने उनके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या?
पिनरायी विजयन के इस्तीफे के बाद अब नजरें नई सरकार के गठन पर टिकी हैं। यूडीएफ की जीत के बाद कांग्रेस के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन इस बदलाव के दूरगामी राजनीतिक असर क्या होंगे, इस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।









