‘साइलेंट किलर’ का रेड अलर्ट! 75.3 लाख बच्चे-किशोर चपेट में… 14-19 साल के युवाओं पर सबसे बड़ा हमला

नई ग्लोबल स्टडी का चौंकाने वाला खुलासा—क्या 2050 तक और विकराल होगी ये बीमारी?

नई दिल्ली। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ रही Chronic Kidney Disease (CKD) को लेकर बड़ा रेड अलर्ट जारी किया है। ताज़ा वैश्विक शोध के मुताबिक किडनी की यह गंभीर बीमारी अब सिर्फ बड़ों तक सीमित नहीं रही—0 से 19 वर्ष तक के बच्चों में इसके मामले खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं।

 75.3 लाख नए मामले—एक साल में डराने वाला आंकड़ा

वर्ष 2021 के आंकड़ों पर आधारित इस व्यापक विश्लेषण में खुलासा हुआ कि एक ही साल में दुनियाभर में लगभग 75.3 लाख बच्चे और किशोर CKD की चपेट में आए।
औसतन हर 1 लाख बच्चों में 29 नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं—जो विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

 किशोरों पर सबसे बड़ा प्रहार—44% की उछाल

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला पहलू 14 से 19 वर्ष के किशोरों में मामलों की तेज़ रफ्तार है।
पिछले कुछ वर्षों में इस आयु वर्ग में CKD के मामलों में 44% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

संभावित कारण:

  • बदलती और अस्वस्थ जीवनशैली

  • फास्ट फूड और अधिक नमक का सेवन

  • शुरुआती लक्षणों की अनदेखी

  • समय पर जांच न होना

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जा रहा है।

 क्षेत्रीय असमानता—सबसे ज्यादा असर मध्य एशिया में

रिपोर्ट बताती है कि Central Asia बच्चों में CKD के नए मामलों का बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।

🔎 मुख्य बिंदु:

  • कम आय वाले और विकासशील देशों में मृत्यु दर अधिक

  • डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट की सीमित सुविधाएं

  • ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी

यह आंकड़े दिखाते हैं कि यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, बल्कि आर्थिक असमानता का भी बड़ा संकेत है।

 2050 तक क्या सुधरेंगे हालात?

अध्ययन के अनुमान के अनुसार, यदि वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत किया गया, तो 2050 तक नए मामलों की दर में मामूली गिरावट संभव है।
लेकिन जिन देशों में स्वास्थ्य ढांचा कमजोर है, वहां स्थिति और भयावह हो सकती है।

 बचाव ही सबसे बड़ा हथियार

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को CKD से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका अर्ली डिटेक्शन है।

✔️ परिवार में इतिहास हो तो नियमित जांच कराएं
✔️ थकान, पैरों में सूजन या पेशाब के रंग में बदलाव को नजरअंदाज न करें
✔️ सरकारें ग्रामीण इलाकों में नेफ्रोलॉजी और डायलिसिस सुविधाएं बढ़ाएं

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