शराब घोटाला छुपाने की साजिश: ACB की भूमिका पर उठे सवाल, बाबूलाल मरांडी ने लगाए गंभीर आरोप

Conspiracy to hide liquor scam: Questions raised on the role of ACB, Babulal Marandi made serious allegations

झारखंड का उत्पाद विभाग लगातार सुर्खियों में है. कई बार शराब घोटाले को लेकर तो कई बार उत्पाद नीति में लगातार बदलावों को लेकर. लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलहदा है. मामला उत्पाद विभाग की फाइलों को आधी रात ट्रकों से ढोए जाने से जुड़ा है.

आखिर ऐसा क्या हुआ कि उत्पाद विभाग की फाइलों को रात के अंधेरे में ट्रकों के माध्यम से ढोया जाने लगा. क्या यह कार्रवाई राज्य के किसी बड़े अधिकारी या सिंडिकेट को बचाने के लिए की गई. क्या उत्पाद विभाग के फाइलों को ट्रकों के माध्यम से आधी रात इसलिए ढ़ोया गया कि ईडी और सीबीआइ की एंट्री से पहले मामले को ही रफा-दफा कर दिया जाए. वो कौन था जिसके इशारे पर उत्पाद विभाग की फाइलों को आधी रात ट्रकों से ढ़ोया जाने लगा.

बाबूलाल मरांडी ने लगाए कई आरोप!

झारखंड के पूर्व सीएम व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे प्रकरण पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. बाबूलाल मरांडी द्वारा इस पूरे मामले को उठाए जाने के बाद विभागीय मंत्री का भी बयान आया है. क्या है पूरा मामला, क्यों उत्पाद विभाग सुर्खियों में है. आइए सबकुछ जानते हैं विस्तार से.

बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट पर क्या लिखा?

इस पूरे मामले की शुरुआत बाबूलाल मरांडी के एक ट्वीट से होती है. बीते 29 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर ट्वीट कर कथित झारखंड शराब घोटाले की जांच कर रही एसीबी औऱ उत्पाद विभाग पर गंभीर आरोप लगाया. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में उत्पाद विभाग से एसीबी द्वारा भारी मात्रा में विभागीय कागजात ट्रकों में भर कर ले जाए गए. बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले में डीजीपी पर हमला बोला है.

बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि डीजीपी की निगरानी में ही बीते मंगलवार रात को अंधेरे में ट्रक के जरिए उत्पाद विभाग के कागजात ढोए गए, जो संदिग्ध है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखाकर इसे ईडी और सीबीआइ की जांच से बड़े राजनीतिक व्यक्तियों को बचाने की साजिश बताया. एसीबी की इस कार्रवाई से शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया में बाधा आने की बात भी उन्होंने कही है.

“शराब घोटाले केस में सबूत मिटाने की कोशिश”

बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी पर आरोप गढ़ते हुए कहा है कि यह काम महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने के लिए डीजीपी द्वारा किया जा रहा है. आने वाले समय में केंद्रीय एजेंसी, ईडी और सीबीआइ की जांच की आशंका को देखते हुए घोटालों के सबूतों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. आगे उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले का संज्ञान लेने और सबूतों को नष्ट होने से रोकने की अपील की है. इस बात की जांच करने को भी कहा है कि किसके इशारे में सबूतों को नष्ट करने की कोशिश हो रही है.

2022 में लागू हुई थी उत्पाद नीति

गौरतलब है कि झारखंड में छत्तीसगढ़ मॉडल की तर्ज पर साल 2022 में नई शराब नीति लागू हुई थी. लेकिन इसमें बड़े घोटाले की बात सामने आयी. इस शराब घोटाले की वजह से सरकारी खजाने को 450 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा. जांच में कई बड़े खुलासे भी हुए, जिनमें नकली होलोग्राम, अवैध शराब की बिक्री, और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए गबन शामिल हैं. इस घोटाले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और जांच का दायरा झारखंड से छत्तीसगढ़, दिल्ली और हरियाणा तक भी पहुंच गया है.

27 सिंतबर 2024 को शुरू हुई थी घोटाले की जांच

एसीबी ने 27 सितंबर 2024 को प्रारंभिक जांच शुरू की थी. जांच में कई अहम साक्ष्य मिले थे, जिसके आधार पर ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व तत्कालिन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को 20 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया. विनय चौबे पर शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर 38 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. हालांकि 90 दिनों की समय सीमा पूरी होने के बाद भी विनय चौबे के खिलाफ एसीबी द्वारा चार्जशीट दाखिल नहीं किये जाने पर उन्हें अदालत ने सशर्त जमानत दी है.

उस वक्त भी बाबूलाल मरांडी ने इसे जांच में ढिलाई का आरोप लगाते हुए कहा था कि यह शराब घोटाले में आरोपी आईएएस विनय चौबे को बचाने की सुनियोजित साजिश थी. कोर्ट ने जमानत पर सख्त शर्तें लगाईं, जैसे चौबे का राज्य छोड़कर न जाना और मोबाइल नंबर नहीं बदलना होगा.

10 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

वहीं अब तक इस मामले में 10 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह, और छत्तीसगढ़ के कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया शामिल हैं. एसीबी ने 27 लोगों को समन जारी किया, जिनमें से कई से पूछताछ अभी भी जारी है. इसके अलावे जांच में छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट से जुड़े माफियाओं की भूमिका भी सामने आई है. जिन्हें बीते कल एसीबी ने समन जारी कर पूछताछ के लिए एसीबी कार्यालय बुलाया है.

2022 में सीएम को बाबूलाल मरांडी ने लिखा था पत्र

गौरतलब है कि बाबूलाल मरांडी ने साल 2022 में ही सीएम को पत्र लिखकर शराब नीति की खामियों के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. बहरहाल, अब शराब घाटोले में एसीबी द्वारा जांच में ढिलाई, पूछताछ के दौरान रिकॉर्डिंग न करने, और चार्जशीट दाखिल न करने जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है. बहरहाल, अब इस पूरे मामले में विपक्ष ने सीबीआई से जांच कराने मांग की है. इस खबर पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट कर जरूर बताये

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