भारत-कनाडा परमाणु डील पर सियासी घमासान: जयराम रमेश का बड़ा दावा— ‘मोदी सरकार की सफलता के पीछे मनमोहन सिंह का हाथ!
Political turmoil over India-Canada nuclear deal: Jairam Ramesh makes a big claim – 'Manmohan Singh's hand is behind the success of the Modi government!

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सोमवार को भारत-चीन रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी समझौते का श्रेय कांग्रेस को दिया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल 2008 के भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते के कारण ही संभव हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भाजपा समेत तीव्र राजनीतिक विरोध के बावजूद यह समझौता पारित किया, जिसने भारत के “परमाणु रंगभेद” को समाप्त किया।
रमेश ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि कनाडा और भारत के बीच नया परमाणु सहयोग समझौता भी उसी दिशा में संभव हुआ। 2010 में कनाडा ने भारत के साथ दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) निर्माण पर समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत 2.6 अरब डॉलर का यूरेनियम आपूर्ति अनुबंध और एसएमआर तकनीक में साझेदारी शामिल है। कनाडा की कंपनी Cameco अगले दशक में भारत को लगभग 22 मिलियन पाउंड यूरेनियम सांद्र प्रदान करेगी, जिससे भारत के प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टरों के लिए ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों को आसानी से सुरक्षित क्षेत्रों में स्थापित किया जा सकता है और यह भारत की “नेट जीरो” रणनीति का हिस्सा बनेंगे। जयराम रमेश ने कहा कि भारत की परमाणु यात्रा अमेरिका के तारापुर रिएक्टर से शुरू हुई थी, लेकिन कनाडा ने कलपक्कम और अन्य स्थानों पर भारी जल रिएक्टर स्थापित कर भारत की सहायता की। 18 मई, 1974 को पोखरण-I परीक्षण के बाद कनाडा ने इस सहयोग को रोक दिया था।
सांसद ने यह भी बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कनाडा ने भारत को भारी जल रिएक्टरों में सहयोग प्रदान किया था, जिससे भारत की परमाणु क्षमता का विकास संभव हुआ। यह ऐतिहासिक क्षण भारत के उथल-पुथल भरे परमाणु इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ है।









