झारखंड की सियासी कहानी: 25 साल में 14 CM, 3 राष्ट्रपति शासन, जानिए अब क्या है भविष्य?
Jharkhand's political story: 14 CMs in 25 years, 3 President's rules, know what the future holds now?

धनबाद (Dhanbad): बिहार से अलग होकर बने झारखंड ने अब अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कभी “राजनीति की प्रयोगशाला” कहा जाने वाला यह राज्य अब विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। इन 25 वर्षों में झारखंड ने 14 मुख्यमंत्री देखे और तीन बार राष्ट्रपति शासन भी लगा, लेकिन अब राज्य अपने राजनीतिक अस्थिरता के दौर से निकलकर स्थिरता की ओर कदम बढ़ा रहा है।
झारखंड आंदोलन की नींव जयपाल सिंह मुंडा ने रखी थी, जिसे बाद में एन. ई. होरो, रामदयाल मुंडा और बागुन सुम्ब्रई जैसे नेताओं ने आगे बढ़ाया। आंदोलन को बल तब मिला जब शिबू सोरेन, विनोद बिहारी महतो और ए. के. राय ने धनबाद में मिलकर झामुमो (JMM) का गठन किया। आखिरकार, 15 नवंबर 2000 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया और बाबूलाल मरांडी पहले मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद झारखंड की राजनीति में लगातार उतार-चढ़ाव आता रहा। अर्जुन मुंडा, शिबू सोरेन, मधु कोड़ा, रघुवर दास और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं ने मुख्यमंत्री पद संभाला। कभी निर्दलीय विधायक मधु कोड़ा मुख्यमंत्री बने, तो कभी गठबंधन टूटने से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा।
राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद झारखंड ने शिक्षा, उद्योग और खनन क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। हाल के वर्षों में हेमंत सोरेन सरकार ने सामाजिक न्याय और जनकल्याण के क्षेत्र में कई पहल कीं।
2024 में महागठबंधन की प्रचंड जीत और हेमंत सोरेन की पुनर्वापसी के साथ राज्य ने एक नई शुरुआत की है। झारखंड के 25 वर्षों की यह यात्रा संघर्ष, बदलाव और नई उम्मीदों की कहानी है — जो अब स्थिर शासन और विकास की दिशा में अग्रसर है।









