“थाली में ज़हर?” राज्यसभा में गूंजा राघव चड्ढा का तीखा सवाल, बताया कैसे मिलावटी खाना बना रहा देश को बीमार

दूध में यूरिया, सब्ज़ियों में ऑक्सीटोसिन… सांसद ने गिनाईं वो सच्चाइयाँ जो हर परिवार को डरा दें

नई दिल्ली, 4 फरवरी।देश में आम आदमी की थाली तक पहुंच रहा खाना कितना सुरक्षित है? इसी डरावने सवाल को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने खाने में मिलावट को एक साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी बताते हुए कहा कि यह संकट सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं की जिंदगी के लिए खतरा बन चुका है।

राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि बड़ी-बड़ी कंपनियां “सेहतमंद” और “एनर्जी देने वाले” झूठे दावों के नाम पर लोगों को ज़हर बेच रही हैं, और सरकार की निगरानी व्यवस्था आंख मूंदे बैठी है।

दूध से मसाले तक… हर चीज़ में मिलावट की डरावनी लिस्ट

सांसद ने सदन में रोजमर्रा की चीजों में हो रही मिलावट का ऐसा खौफनाक सच रखा, जिसे सुनकर सदन भी सन्न रह गया। उन्होंने कहा—

  • दूध में यूरिया और डिटर्जेंट

  • सब्ज़ियों में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

  • पनीर में स्टार्च और कास्टिक सोडा

  • आइसक्रीम में डिटर्जेंट पाउडर

  • फलों के जूस में सिंथेटिक फ्लेवर और आर्टिफिशियल रंग

  • खाने के तेल में मशीन का तेल

  • मसालों में ईंट का पाउडर और लकड़ी का बुरादा

  • चाय में सिंथेटिक रंग

  • पोल्ट्री प्रोडक्ट्स में एनाबॉलिक स्टेरॉयड

  • यहां तक कि देशी घी से बनी मिठाइयों में भी वनस्पति और डालडा का इस्तेमाल

“मां दूध देती है, ज़हर नहीं” — भावुक अपील

राघव चड्ढा ने एक मां का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वह अपने बच्चे को दूध का गिलास देती है, तो उसे लगता है कि वह उसे कैल्शियम और प्रोटीन दे रही है।
लेकिन सच्चाई यह है कि उसे पता भी नहीं चलता और वह अपने बच्चे को यूरिया और डिटर्जेंट मिला दूध पिला देती है।

उन्होंने एक रिसर्च स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि

  • 71% दूध के सैंपल में यूरिया

  • 64% सैंपल में न्यूट्रलाइजर (सोडियम बाइकार्बोनेट) पाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में जितना दूध बेचा जा रहा है, उतना उत्पादन ही नहीं हो रहा—जो खुद मिलावट की ओर इशारा करता है।

हर चार में से एक चीज़ मिलावटी!

सांसद ने आंकड़ों के जरिए चौंकाने वाला खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि 2014-15 से 2025-26 के बीच जांच किए गए खाद्य सैंपलों में से 25% सैंपल मिलावटी पाए गए, यानी हर चार में से एक चीज़ ज़हरीली है।

सब्ज़ियों में इस्तेमाल हो रहे ऑक्सीटोसिन को उन्होंने बेहद खतरनाक बताया, जिससे
 चक्कर,
 सिरदर्द,
 हार्ट फेलियर,
 बांझपन
 और कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

विदेश में बैन, भारत में खुलेआम बिक्री

राघव चड्ढा ने यह मुद्दा भी उठाया कि भारत की कुछ बड़ी मसाला कंपनियों के उत्पादों पर यूके और यूरोप में कैंसरकारी कीटनाशकों के कारण बैन लग चुका है, लेकिन वही प्रोडक्ट भारत में बेखौफ बिक रहे हैं

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि

“जो चीजें विदेशों में पालतू जानवरों के लिए भी सुरक्षित नहीं हैं, वही हमारे देश में बच्चों को खिलाई जा रही हैं।”

सरकार को दिए सख्त सुझाव

राघव चड्ढा ने खाने की मिलावट पर रोक लगाने के लिए सरकार से कई ठोस कदम उठाने की मांग की—

  • FSSAI को मजबूत करना, पर्याप्त स्टाफ और लैब सुविधाओं के साथ

  • मिलावट करने वालों पर भारी आर्थिक जुर्माना

  • मिलावटी उत्पादों के लिए पब्लिक रिकॉल और नाम उजागर करने की व्यवस्था

  • भ्रामक स्वास्थ्य दावों वाले विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध

सवाल अब हर घर का

राज्यसभा में उठी इस आवाज़ ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या हमारी थाली में पोषण है या ज़हर?
और अगर अब भी सख्ती नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ियों की सेहत का क्या होगा?

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