Packaged Atta Side Effects: लोग अपनी मेहनत से बचने के लिए इन दिनों पैकेट बंद आटा का ही इस्तेमाल करते हैं। वो दौर गुजर गया, जब गेंहू को धोकर, सुखाकर पिसाया जाता था। लेकिन, अभी जो हम जानकारी देने जा रहे हैं, उसके बाद आपका पॉकेट बंद आटों से विश्वास खत्म हो जायेगा। हालांकि शहरों में पॉकेट बंद आटों के अलावे कुछ और रास्ता बचता भी नहीं है। लेकिन आपको ये जानना जरूरी है कि, जिस रोटी को आप हम बड़े स्वाद से खाते हैं वो रोटी आपको धीरे-धीरे बीमार बना रही है।

बीमार बना रहा है पॉकेट बंद आटा
मार्केट में मिलने वाले पैकेट बंद आटे में कई तरह के प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं और इसे काफी बारीक पीसा जाता है जो अन्न के सारे पोषक तत्वों को खत्म कर देता है।आपको बता दें कि मार्केट में मिलने वाले आटे को इतना बारीक पीसा जाता है कि इसके ज्यादातर पोषकतत्व खत्म हो जाते हैं। इस आटे में फाइबर बिल्कुल न के बराबर होता है। ऐसे में पैकेट वाले आटे की रोटी को पचाना मुश्किल हो जाता है। आटे को सफेद बनाने के लिए कई बार इसमें घटिया क्वालिटी के चावल मिक्स कर दिए जाते हैं। वहीं आटे को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के लिए कैमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। लंबे समय तक पैकेट बंद आटा खाने से मोटापा, डायबिटीज और पाचन संबंधी बीमारियां बढ़ने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य के लिहास से ये आटा बिल्कुल ठीक नहीं है।

पॉकेट बंद आटा खाने वाले ये बातें जरूर ध्यान रखें
अगर आप हेल्थ को लेकर अलर्ट रहते हैं तो सबसे पहले अपने आटे को बदल लें।स्वास्थ्य के लिहास से आपको आटा बदल-बदल कर खाना चाहिए। आप चाहें तो मल्टीग्रेन आटे का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि ये आटा पैकेट बंद नहीं होना चाहिए। इसके लिए आप नजदीक में कोई चक्की खोज लें जहां से अपने सामने आटा पिसवा कर लेकर आएं। चक्की में पिसे आटे में चोकर ज्यादा होता है जो पेट और पाचन के लिए बेहतर होता है। ज्यादा फाइबर वाला आटा खाने से मोटापा कम होता है और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। गेहूं के आटे में मक्का, ज्वार, रागी, सोयाबीन और चना मिक्स करके पिसवा लें। ये आपकी सेहत के लिए सबसे अच्छा होगा। सर्दियों में ज्वार की जगह बाजरा को आटे में मिक्स करवा लें।

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