बजट सत्र की शुरुआत में पीएम मोदी का बड़ा संदेश, क्या 2047 की राह यहीं से तय हो जाएगी?

संसद से निकला ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ का इशारा, लंबे समय से अटके फैसलों पर सरकार का बड़ा दांव

नई दिल्ली, 29 जनवरी:
संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने देश की राजनीति और भविष्य की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि यह बजट सत्र केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगा।

बजट सत्र की शुरुआत में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का उल्लेख किया और कहा कि यह भाषण 140 करोड़ भारतीयों के आत्मविश्वास और आकांक्षाओं की आवाज़ है। उन्होंने सांसदों से अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र प्रमुख के रूप में उन्होंने जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्हें सभी गंभीरता से लें।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी का एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अब भारत उस 25 वर्षीय निर्णायक यात्रा पर निकल चुका है, जो देश की भविष्य की दिशा और वैश्विक भूमिका को परिभाषित करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में लिए जाने वाले फैसले सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की किस्मत तय करेंगे।

इस दौरान पीएम मोदी ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि सत्र की शुरुआत एक “महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत” की सोच को दर्शाती है। उन्होंने इसे भारतीय युवाओं और उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर बताया, जो वैश्विक स्तर पर भारत की पकड़ को और मजबूत करेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने लगातार नौवीं बार बजट पेश कर इतिहास रच दिया है, जो भारत के संसदीय इतिहास में एक गौरवशाली क्षण के रूप में दर्ज होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया के लिए आशा की किरण और आकर्षण का केंद्र बनकर उभरा है। वैश्विक स्तर पर भारत की ओर बढ़ता भरोसा देश की आर्थिक मजबूती और लोकतांत्रिक शक्ति का प्रमाण है।

सरकार के कामकाज पर बोलते हुए पीएम मोदी ने दो टूक कहा कि सरकार का मूल मंत्र “सुधार, प्रदर्शन और बदलाव” है। उन्होंने बताया कि सरकार तेजी से ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर आगे बढ़ रही है और लंबे समय से अटके मुद्दों के लिए अब तात्कालिक नहीं, बल्कि स्थायी और दूरगामी समाधान लागू किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार टेक्नोलॉजी को अपनाएगी, लेकिन इंसान-केंद्रित दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना और अलग-अलग विचार स्वाभाविक हैं, लेकिन सरकार की प्राथमिकता अंतिम छोर तक योजनाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करना है।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत का लोकतंत्र और उसकी विशाल आबादी दुनिया के लिए बड़ी उम्मीद बन चुकी है। संसद के इस मंच से भारत के पास मौका है कि वह दुनिया को अपने लोकतांत्रिक मूल्यों, निर्णयों की विश्वसनीयता और वैश्विक भूमिका का संदेश दे।

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