पेट्रोल-डीजल के दाम अभी और बढ़ेंगे? एक्सपर्ट्स ने दिया बड़ा संकेत, महंगाई की नई सुनामी से कांप सकती है जेब
₹3 की बढ़ोतरी सिर्फ शुरुआत! तेल कंपनियों के घाटे और युद्ध की आग ने बढ़ाई टेंशन

शुक्रवार 15 मई की सुबह देशभर के करोड़ों लोगों के लिए बड़ा झटका लेकर आई। तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। लेकिन डराने वाली बात यह है कि एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ शुरुआत मान रहे हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर चौतरफा मार पड़ सकती है।
नई कीमतों के बाद दिल्ली में पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इसका असर सिर्फ गाड़ी चलाने वालों पर ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति पर पड़ेगा जो रोजमर्रा की चीजें खरीदता है।
आखिर क्यों बढ़े दाम?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 से 89 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है। फरवरी की शुरुआत में जो कच्चा तेल भारत को लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल में मिल रहा था, उसकी कीमत मई तक बढ़कर 104.68 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।
मुश्किल सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है, जिससे विदेशों से तेल खरीदना और महंगा पड़ रहा है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
क्या अभी और बढ़ सकते हैं दाम?
जानकारों के मुताबिक जवाब है—हां। रिपोर्ट्स और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के बयानों के अनुसार, पिछले चार सालों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने दामों में बड़ी बढ़ोतरी नहीं की थी। इसकी वजह से सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 14 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। रेटिंग एजेंसी ICRA और कई आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस नुकसान की भरपाई के लिए तेल की कीमतों में कुल 11 से 25 रुपये तक की बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में मौजूदा 3 रुपये की बढ़ोतरी को सिर्फ पहला झटका माना जा रहा है।
आपके ₹100 के पेट्रोल में कितना टैक्स?
बहुत से लोगों को लगता है कि पेट्रोल महंगा सिर्फ कच्चे तेल की वजह से होता है, लेकिन असली खेल टैक्स का भी है। एक लीटर पेट्रोल की कीमत में कच्चे तेल की लागत, रिफाइनिंग खर्च, ट्रांसपोर्ट, ऑयल कंपनियों का मार्जिन और डीलर कमीशन शामिल होता है। इसके बाद केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारें VAT वसूलती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल-डीजल सरकारों के लिए कमाई का सबसे भरोसेमंद जरिया हैं। इन्हीं टैक्स से सड़कें, हाईवे और कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। इसलिए सरकारों के लिए टैक्स कम करना आसान फैसला नहीं होता।
अब महंगाई की नई मार के लिए तैयार रहिए
फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि डीजल महंगा होने का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है। ट्रकों का किराया बढ़ते ही फल, सब्जियां, राशन, दूध और दूसरी जरूरी चीजों की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं। यानी पेट्रोल-डीजल की आग अब सीधे आपकी रसोई तक पहुंच सकती है।
इसी बीच अमूल और मदर डेयरी पहले ही दूध के दाम बढ़ा चुके हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि आने वाले हफ्तों में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है, जिसका असर हर घर के बजट पर दिखाई देगा।









