हे भगवान ! शिक्षक के 30 लाख रुपये बह गये बारिश की पानी में, जोरदार बारिश के बीच घर में घुसा पानी, फिर पूरा पैसा बहा ले गया…
Oh God! The teacher's 30 lakh rupees were washed away in the rain water, water entered the house during heavy rain and then took away all the money...

Teacher News: भीषण बारिश के बीच एक बेहद ही मार्मिक खबर आयी है। एक शिक्षक की जिंदगी भर की कमायी बारिश की पानी में बह गया। शिक्षक ने जमीन खरीदने के लिए 30 लाख रुपये जुटाये थे, लेकिन रजिस्ट्री के ठीक पहले अचानक बारिश आयी और फिर सब कुछ तहस नहस हो गया। घटना हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के थुनाग बाजार की है, जहां से ये मार्मिक घटना सामने आई है।
जहां बाढ़ ने एक शिक्षक दंपति की जीवनभर की कमाई और भविष्य का सपना लील लिया। घर के साथ वह ट्रंक भी बह गया, जिसमें 30 लाख रुपये और गहने रखे थे। मंडी जिले के थुनाग बाजार में रहने वाले शिक्षक दंपति मुरारी लाल ठाकुर और उनकी पत्नी रोशनी देवी की कहानी ऐसी ही एक दर्दनाक त्रासदी बनकर सामने आई है, जो हर संवेदनशील हृदय को झकझोर देगी।
30 जून की रात आई तेज बारिश और बाढ़ ने उनका आशियाना, जमा पूंजी और भविष्य का सपना, सब कुछ एक झटके में छीन लिया। दंपति ने बड़ी मेहनत और वर्षों की बचत से एक प्लॉट खरीदने का फैसला किया था, जिसकी कीमत 30 लाख रुपये थी। उन्होंने 20 जून को यह सौदा तय किया और 7 जुलाई को रजिस्ट्री की तारीख भी तय हो चुकी थी।
इस रकम को उन्होंने गहनों सहित एक लोहे के ट्रंक में संभालकर रखा था, जिसे बाढ़ उस घर समेत बहा ले गई, जिसमें वह ट्रंक रखा गया था।
“अब सिर्फ वही कपड़े हैं जो उस रात तन पर थे”
मुरारी लाल कहते हैं,
“बाढ़ की रात बस जान बचा सके। जिस घर में ट्रंक था, वो पूरा बह गया। अब केवल वो कपड़े हैं जो उस रात पहने थे और जेब में बचे 650 रुपये।”
उनकी पत्नी रोशनी देवी का कहना है,
“हम शिक्षक हैं, लेकिन आज खुद रास्ता भटक चुके हैं। हमारे पास अब न घर है, न पैसा, न भविष्य की दिशा।”
अब यह दंपति उस मलबे में ट्रंक तलाश रहे हैं, जिसमें उनका भविष्य बंद था। गांववालों और स्थानीय प्रशासन से मदद ली जा रही है, लेकिन अब तक कोई सुराग नहीं मिला। इस घटना ने यह भी उजागर किया है कि किस तरह एक प्राकृतिक आपदा मध्यवर्गीय परिवारों की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर देती है।मुरारी लाल और रोशनी देवी अब सरकार और समाज से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वे चाहते हैं कि उन्हें फिर से खड़े होने का एक मौका मिले, कोई उन्हें कहे —
“आपका ट्रंक मिल गया… आपका घर फिर से बनेगा।”









