अब बच नहीं पाएंगे भगोड़े! विदेशों में छिपे 70+ भारतीय अपराधियों पर कसा शिकंजा, वापसी की उलटी गिनती शुरू
दशक में पहली बार इतनी बड़ी पहचान… सरकार की सख़्ती से दुनिया भर में मचा हड़कंप

नई दिल्ली से सामने आई यह खबर देश छोड़कर भागे भगोड़ों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। भारत सरकार ने विदेशों में छिपे अपराधियों पर शिकंजा कसते हुए 2024-25 के दौरान 70 से अधिक भारतीय भगोड़ों का पता लगा लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, एक दशक से ज्यादा समय में यह सबसे बड़ी संख्या है, जिसने भगोड़ों की नींद उड़ा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, इसी अवधि में भारत में छिपे 203 ऐसे भगोड़ों की भी पहचान की गई, जिन्हें दूसरे देश तलाश रहे थे। यानी अब भारत सिर्फ अपने अपराधियों को ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों के वांछित अपराधियों पर भी कार्रवाई तेज़ कर रहा है।
27 भगोड़े लाए गए भारत, बाकी की तलाश जारी
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि पिछले वित्तीय वर्ष में 27 भगोड़े/वांछित अपराधियों को विदेशों से भारत लाया गया। अधिकारियों का दावा है कि आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ सकती है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि अब भगोड़ों को सुरक्षित पनाह मिलना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ तालमेल पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।
लेटर रोगेटरी से बढ़ा दबाव, विदेशी एजेंसियों से मांगा सहयोग
अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच भारत ने 74 लेटर रोगेटरी (LR) विदेशों में भेजे।
लेटर रोगेटरी एक तरह की न्यायिक अपील होती है, जिसके जरिए भारतीय जांच एजेंसियां विदेशी अधिकारियों से जांच में सहयोग मांगती हैं। इससे साफ है कि अब सरकार कानूनी रास्तों से भी पूरा दबाव बना रही है।
CBI और एजेंसियों की बड़ी भूमिका
CBI समेत अन्य जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि इस दौरान
47 कानूनी नोटिसों पर पूरी तरह कार्रवाई की गई
29 मामलों को आंशिक कार्रवाई के बाद बंद या वापस लिया गया
हालांकि, 31 मार्च 2025 तक 533 कानूनी नोटिस अभी भी लंबित हैं। इनमें
276 मामले CBI से जुड़े
257 मामले राज्य पुलिस और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से संबंधित हैं
भगोड़ों के लिए खतरे की घंटी!
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि सरकार अब भगोड़ों के खिलाफ निर्णायक मोड में आ चुकी है।









