अब ट्रेन का खाना देख डर नहीं…स्वाद से चौंक जाएंगे…IRCTC ने चुपचाप बदल दिया रेल में खाने का पूरा खेल…
सालों से बदनाम रेलवे खाने की तस्वीर बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है। IRCTC ने ऐसा सिस्टम लागू किया है, जिसमें ट्रेन का खाना अब रेस्टोरेंट जैसी क्वालिटी का होगा—वो भी नामी ब्रांड्स के साथ।

नई दिल्ली। रेल यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा शिकायत अगर किसी एक चीज को लेकर रही है, तो वह है ट्रेन में मिलने वाला खाना। स्वाद, साफ-सफाई और गुणवत्ता को लेकर यात्रियों की नाराजगी अब तक आम बात थी। लेकिन अब यह कहानी बदलने जा रही है।
भारतीय रेलवे की कैटरिंग इकाई IRCTC ने ट्रेन में खाने का पूरा सिस्टम ही बदलने का फैसला किया है।
ट्रेन के खाने पर नई सोच, नया सिस्टम
रेल मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम IRCTC हर दिन करीब 16.5 लाख यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराता है। यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं को देखते हुए अब खाना बनाने और परोसने की जिम्मेदारी अलग-अलग कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत:
खाना आधुनिक और हाई-स्टैंडर्ड किचन में बनेगा
तय गुणवत्ता मानकों के साथ पैक होकर ट्रेनों तक पहुंचेगा
ऑनबोर्ड स्टाफ सिर्फ सर्विस पर ध्यान देगा, न कि खाना बनाने पर
ट्रेन में उतरे नामी फूड ब्रांड्स
IRCTC ने इस नई व्यवस्था को Proof of Concept (PoC) के तौर पर शुरू किया है। यह फिलहाल देश के अलग-अलग रेलवे जोन की चुनिंदा ट्रेनों में लागू की गई है।
खासतौर पर:
वंदे भारत
अमृत भारत
जैसी आधुनिक ट्रेनों में यह प्रयोग किया जा रहा है।
इन ट्रेनों में अब यात्रियों को खाना परोस रहे हैं—
Haldiram’s, Elior, Casino Air Caterers, ISKCON जैसे बड़े और भरोसेमंद फूड ब्रांड्स।
हर स्टेज पर सख्त निगरानी
IRCTC के अनुसार, इस ट्रायल के दौरान:
किचन की साफ-सफाई
खाना बनाने की प्रक्रिया
पैकेजिंग
ट्रांसपोर्टेशन
और ट्रेन में सर्विस
हर एक चरण की बारीकी से जांच की जा रही है।
मेनू में क्षेत्रीय स्वाद, सेहतमंद विकल्प और बेहतर प्रेजेंटेशन को खास जगह दी गई है।
यात्रियों का फीडबैक बना गेमचेंजर
अब तक मिले यात्रियों के फीडबैक ने IRCTC का हौसला बढ़ा दिया है।
यात्रियों ने:
खाने के स्वाद में सुधार
ताजगी
और साफ-सफाई
को लेकर सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अगर यह मॉडल पूरी तरह सफल रहा, तो इसे लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।
भविष्य की रेल यात्रा का इशारा
IRCTC का यह कदम साफ संकेत देता है कि भारतीय रेलवे अब सिर्फ सफर कराने तक सीमित नहीं रहना चाहता।
मकसद है—
👉 सफर को आरामदायक, सुरक्षित और स्वादिष्ट अनुभव में बदलना।
अगर यह प्रयोग पूरी तरह कामयाब रहा, तो आने वाले दिनों में
ट्रेन का खाना यात्रियों के लिए मजबूरी नहीं, बल्कि एक अच्छा अनुभव बन सकता है।



















