झारखंड : आदिवासी बच्चों की नई उम्मीद…सीएम एक्सीलेंस स्कूल…जानिए कैसे बदल रही है उनकी जिंदगी

Jharkhand: New hope for tribal children...CM Excellence School...Know how their lives are changing

झारखंड आज अपने 25 गौरवशाली वर्षों का जश्न मना रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राज्य ने नई ऊंचाइयों को छुआ है। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ा कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार की पहल “सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” है, जिसने सरकारी स्कूलों की परिभाषा बदल दी है और गरीब व आदिवासी बच्चों के लिए शिक्षा का नया अध्याय लिखा है।

पहले जहां सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक थी, आज वही स्कूल आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस झारखंड के उन बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ है जो पहले कॉनवेंट स्कूलों की पढ़ाई का केवल सपना देख सकते थे।

इन स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर तैयार किया गया है, ताकि छात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं में सफल हो सकें। वर्तमान में 80 सीएम एक्सीलेंस स्कूल संचालित हो रहे हैं, जबकि आने वाले वर्षों में इनकी संख्या 4,496 तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

यहां छात्रों को भाषा लैब, कंप्यूटर लैब, साइंस और मैथ्स लैब, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, और खेल सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां कोई फीस नहीं ली जाती, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है—प्रवेश परीक्षा के बाद मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन किया जाता है। आगामी सत्र 2025–26 के लिए आवेदन 20 जनवरी से 10 फरवरी 2025 तक होंगे।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के शब्दों में, “सीएम एक्सीलेंस स्कूल सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का द्वार हैं।” यह पहल उस झारखंड के सपने को साकार कर रही है जहां हर बच्चा आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सके और अपने सपनों को हकीकत में बदल सके।

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