करवा चौथ में नहीं दिखेगा चांद: जानिये इस बार क्यों नहीं दिखेगा चतुर्थी का चांद, 9 साल बाद दुर्लभ संयोग, अब सुहागिनों का व्रत कैसे होगा पूरा…

Moon will not be visible on Karwa Chauth: Know why the moon will not be visible on Chaturthi this time, a rare coincidence after 9 years, how will the fast of married women be completed now...

  1. Karwa Chauth 2025। देशभर में सुहागिनें करवा चौथ 2025 की तैयारी में जुटी हैं। करवा चौथ हर साल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है, जो इस बार 10 अक्टूबर (शुक्रवार) को है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। साथ ही पूरे दिन उपवास रखने के बाद महिलाएं चंद्रोदय के समय पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलती हैं।

 

लेकिन, इस बार का करवा चौथ कुछ अलग और दुर्लभ खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस साल चतुर्थी का चांद दिखाई नहीं देगा। यह संयोग करीब 9 साल बाद बन रहा है, जब करवा चौथ की तिथि चंद्रोदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

 

चतुर्थी पर क्यों नहीं दिखेगा चांद?

इस वर्ष कार्तिक कृष्ण चतुर्थी तिथि 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 54 मिनट से शुरू होगी और 10 अक्टूबर की शाम 7 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी।वहीं चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 14 मिनट पर रहेगा।इसका अर्थ यह है कि जब तक चांद आकाश में नजर आएगा, तब तक पंचमी तिथि लग चुकी होगी। इसीलिए 2025 में करवा चौथ पर चतुर्थी का चांद नहीं, बल्कि पंचमी तिथि का चांद दिखाई देगा।

 

हालांकि तिथि के परिवर्तन से व्रत की धार्मिक महत्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सुहागिनें चांद को अर्घ्य देकर, उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना करेंगी।

इस बार 14 घंटे से अधिक का निर्जला व्रत

पंचांग के अनुसार, इस साल करवा चौथ का व्रत सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होगा और रात 8 बजकर 14 मिनट तक चलेगा। यानी महिलाओं को करीब 14 घंटे से ज्यादा का निर्जला उपवास रखना होगा। यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें जल और अन्न का सेवन नहीं किया जाता।

 

करवा चौथ व्रत विधि और परंपरा

करवा चौथ की शुरुआत सुबह सरगी खाने से होती है, जिसे सास अपनी बहू को देती हैं। इसके बाद महिलाएं स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं।

दोपहर के समय महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय और गणेश की पूजा करती हैं। शाम के समय वे मिट्टी के करवे से चौथ माता का पूजन करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं।

 

रात को जब चांद दिखाई देता है, तो महिलाएं एक छन्नी में दीपक रखकर चंद्रमा को देखती हैं, फिर उसी छन्नी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। इसके बाद चंद्रमा को जल अर्पित कर, पति के हाथ से पानी ग्रहण करती हैं और व्रत खोलती हैं।

 

9 साल बाद बन रहा अद्भुत संयोग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, करवा चौथ पर पंचमी तिथि का चांद अत्यंत दुर्लभ योग है। ऐसा संयोग पिछले 9 वर्षों में नहीं बना था। इसे “सौभाग्य वृद्धि योग” भी कहा जा रहा है, जिसमें व्रती महिलाओं को विशेष फल की प्राप्ति होती है।

इस बार का करवा चौथ न केवल श्रद्धा और आस्था का पर्व है, बल्कि यह खगोलीय दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। महिलाएं इस दिन अपने पतियों के दीर्घ और सुखी जीवन के लिए उपवास रखकर, प्रेम और समर्पण की नई मिसाल पेश करेंगी।

 

मुख्य बिंदु:

• करवा चौथ 10 अक्टूबर 2025, शुक्रवार को।

• चंद्रोदय रात 8:14 बजे पंचमी तिथि पर।

• चतुर्थी का चांद नहीं दिखेगा — दुर्लभ संयोग।

• व्रत अवधि: सुबह 6:20 बजे से रात 8:14 बजे तक।

• 9 साल बाद बन रहा अनोखा खगोलीय योग।

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