मौत के बाद भी हो रही शादी! बेटे की आखिरी इच्छा ने बना दिया गांव को ‘रहस्यमयी मंदिर’ का गवाह

लव मैरिज का विरोध बना त्रासदी—23 साल से हर रामनवमी पर मूर्तियों की शादी, गांव में आज भी सिहरन पैदा करती है ये परंपरा

तेलंगाना से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और रहस्यमयी कहानी सामने आई है, जो सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। यहां एक माता-पिता पिछले 23 सालों से अपने मृत बेटे की शादी हर साल पूरे रीति-रिवाजों के साथ करवा रहे हैं—वो भी मूर्तियों के जरिए।

यह कहानी साल 2003 की है, जब राम कोटी नाम के युवक ने अपने परिवार के लव मैरिज के विरोध से आहत होकर आत्महत्या कर ली थी। इस दर्दनाक घटना के कुछ ही दिनों बाद उसकी प्रेमिका ने भी अपनी जान दे दी। दो मौतों ने दोनों परिवारों को अंदर तक तोड़कर रख दिया।

लेकिन असली सिहरन पैदा करने वाली बात तो इसके बाद शुरू हुई…

बताया जाता है कि कुछ समय बाद राम कोटी अपनी मां के सपने में आया। उसने मंदिर बनाने और अपनी अधूरी शादी को पूरा करने की इच्छा जताई। इस सपने ने माता-पिता लालू और सुक्कम्मा की जिंदगी बदल दी। उन्होंने अपने घर में एक छोटा सा मंदिर बनवाया और बेटे व उसकी प्रेमिका की मूर्तियां स्थापित कर दीं।

तब से लेकर आज तक, हर साल रामनवमी के दिन यहां एक अनोखा और रहस्यमयी अनुष्ठान होता है—मूर्तियों की शादी। पूजा, भोग और पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यह विवाह संपन्न कराया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी जीवित जोड़े की शादी होती है।

शुरुआत में यह माता-पिता का निजी दुख और श्रद्धांजलि थी, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे गांव की परंपरा बन गई। आज इस अनुष्ठान में गांव के लोग, रिश्तेदार और आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल होते हैं।

गांव के लोगों का मानना है कि इस तरह के आयोजन से दिवंगत आत्माओं को शांति मिलती है। वहीं कुछ लोग इसे एक रहस्यमयी आस्था मानते हैं, जो आज भी लोगों के मन में डर और श्रद्धा दोनों पैदा करती है।

23 साल पुरानी यह परंपरा सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उस दर्द की कहानी है जिसे एक मां-बाप आज भी जी रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे की याद को कभी मरने नहीं दिया—बल्कि उसे एक ऐसी परंपरा में बदल दिया, जो अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुकी है।

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