चंद्रग्रहण बेअसर! इस रहस्यमयी मंदिर में नहीं रुकती आरती… 24 घंटे खुले रहते हैं द्वार

देशभर में बंद रहेंगे मंदिर, लेकिन खंडवा का यह धाम तोड़ता है परंपरा — ग्रहण में भी जारी रहता है अखंड हवन

देशभर में आज लगने वाला चंद्रग्रहण आम लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का विषय बना हुआ है। ज्यादातर मंदिरों, ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों में ग्रहण के दौरान दर्शन-पूजन बंद कर दिए जाते हैं।

लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित अवधूत संत दादाजी धूनीवाले मंदिर में तस्वीर बिल्कुल अलग है। यहां चंद्रग्रहण हो या सूर्यग्रहण — मंदिर के द्वार कभी बंद नहीं होते।

 24 घंटे, सातों दिन… बिना रुके जलती है धूनी

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां दर्शन-पूजन 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन लगातार जारी रहता है।

यहां के सेवादार श्री केशवानंद जी महाराज (बड़े दादाजी) और श्री हरिहरानंद जी महाराज (छोटे दादाजी) की समाधि का स्नान, श्रृंगार और आरती नियमित विधि से करते हैं। मंदिर में ग्रहण को कोई अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता।

 ग्रहण के समय भी खुले रहेंगे द्वार

मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, दुनियाभर में लगने वाले चंद्रग्रहण के दौरान भी यहां श्रद्धालु रोज की तरह दर्शन कर सकेंगे।

मंदिर की व्यवस्था दादाजी महाराज और छोटे दादाजी द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार संचालित होती है। यही कारण है कि यहां ग्रहण के दौरान भी पूजा-पाठ, आरती और भजन में कोई विराम नहीं आता।

 दादाजी की मान्यता… क्यों नहीं पड़ता ग्रहण का असर?

दादाजी महाराज ने अपनी पुस्तक केशव विनय में दत्तात्रेय को सभी देवी-देवताओं का एक स्वरूप बताया है। इसी मान्यता के अनुसार सूर्य, चंद्र और नवग्रहों को अलग-अलग सत्ता नहीं माना जाता।

यही आध्यात्मिक विचार इस मंदिर की अनोखी परंपरा की नींव है — जहां ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पूजा-अर्चना लगातार चलती रहती है।

 अखंड हवन और भोग भंडार भी जारी

ग्रहण के समय भी मंदिर में अखंड हवन और भोग भंडार निरंतर चलता है। ट्रस्टी सुभाष नागोरी के अनुसार, श्रद्धालु इस दौरान भी बिना किसी बाधा के पूजा में शामिल हो सकते हैं।

यह परंपरा दादाजी महाराज के समय से चली आ रही है और आज भी उतनी ही दृढ़ता से निभाई जा रही है।

जब देशभर के मंदिरों में सन्नाटा होता है, तब खंडवा का यह धाम आस्था की लौ जलाए रखता है। चंद्रग्रहण की छाया जहां कई स्थानों पर विराम ले आती है, वहीं यहां भक्ति की ज्योति और भी प्रज्वलित हो उठती है।

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