गरीबी का सितम तो देखिए !!! बेटे का शव लाने को नहीं थे पैसे, परिवारवालो ने पुतला बना की अंतिम संस्कार…..

औरंगाबाद के नबीनगर प्रखंड की रामपुर पंचायत के शिवपुर गांव निवासी सुरेंद्र भगत और उनके पिता इंद्रदेव भगत तीन दिनों से रो-रोकर बेहोश हो रहे हैं। जब होश आता है तब सुरेंद्र अपने 20 वर्षीय पुत्र अंकित कुमार को खोजने लगते हैं। गरीबी ने इस परिवार को ताउम्र टीस देने वाला दर्द दिया है।
इंद्रदेव भगत को जिस बेटे से आगे दादा और खुद को कंधा देने की उम्मीद थी, उसके शव को वे देख तक नहीं सके। बीते तीन मई को तेलंगाना के जगदलपुर स्थित जंगली इलाके में पेड़ से अंकित का शव लटकता मिला। ये गरीब परिवार अपने बेटे का शव औरंगाबाद के पैतृक गांव लाने में सक्षम नहीं हो सका।
अंकित के साथ रहने वाले बहनोई राजन भगत ने अगले दिन शव को वहीं दफना दिया। फिर, परिजनों ने गांव में गुरुवार को पुतले का दाह संस्कार किया। हालत यह है कि परिवार के पास अब ब्रह्मभोज कराने के लिए भी पैसे नहीं हैं।
रोते हुए पिता सुरेंद्र, दादा इंद्रदेव और मां गुड्डी देवी ने बताया कि वे बेटे का मरा मुंह भी नहीं देख सके। उसकी हत्या तेलंगाना के जगदलपुर जिले के बेलकाटूर जंगल में हो गई। 20 दिन पहले ही वह घर से अपने बहनोई रंजन भगत के साथ तेलंगाना गया था। उसकी हत्या करंट लगाकर या तेजाब से जलाकर की गई।
परिजनों के अनुसार अंकित के भाई रोहित कुमार ने पुतला बनाकर अंकित का अंतिम संस्कार किया। गुरुवार को ब्राह्मणों के बताए अनुसार श्मशान घाट पर पुतला जलाकर श्राद्ध कर्म कर रहे हैं। तेलंगाना से अंकित के बहनोई रंजन ने फोन पर बताया कि जंगल में पेड़ से लटके मिले शव को पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और उन्हें सौंप दिया।









