Samrat Chaudhary : जानिये कौन हैं सम्राट चौधरी? जिन्होंने सर पर साफा बांधते हुए कसम खायी थी, कि जब नीतीश कुमार को हटा नहीं देंगे, तब तक नहीं खोलेंगे पगड़ी, अब उन्ही के साथ ली शपथ

Samrat Chaudhary सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) को बिहार बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है। साथ ही विजय सिन्हा को विधायक दल का उपनेता चुना गया है। बता दें कि बिहार विधान परिषद में सम्राट चौधरी इस समय प्रतिपक्ष के नेता (Leader of Opposition Samrat Chaudhary) हैं। सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा नई सरकार में डिप्टी सीएम बने। सम्राट चौधरी को नीतीश कुमार का घोर विरोधी कहा जाता है। उन्होंने सर पर साफा बांधते वक्त ये शपथ ली थी, जब तक वो नीतीश कुमार को गद्दी से उतार नहीं देते, तब तक वो सर से पगड़ी नहीं उतारेंगे। वक्त ऐसा बदला कि अब वो नीतीश कुमार के साथ वो डिप्टी सीएम की शपथ ली।
कौन हैं सम्राट चौधरी?
बीते साल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने सम्राट चौधरी को बिहार बीजेपी की कमान सौंपी थी. 54 साल के सम्राट चौधरी शकुनी चौधरी (Shakuni Chaudhary) के बेटे हैं. वे समता पार्टी (Samta Party) के संस्थापकों में से एक हैं. उनका नाम कुशवाहा समाज के बेड़े नेताओं में गिना जाता है. वे खुद भी सांसद और विधायक रहे थे. सम्राट चौधरी साल 1990 में सक्रिय राजनीति में आए थे. बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार, उन्हें 1995 में एक राजनीतिक मामले में 89 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था.
राबड़ी देवी सरकार में थे कृषि मंत्री
1999 में वे राबड़ी देवी सरकार में वो कृषि मंत्री बने. वहीं, साल 2000 और 2010 में वो परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. साल 2014 में वे नगर विकास विभाग के मंत्री रहे. इसके बाद साल 2018 में वे आरजेडी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे और एनडीए सरकार में पंचायती राज मंत्री थे.
छह साल पहले भाजपा में शामिल हुए थे सम्राट चौधरी
बिहार में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त करने के कदम को लव (कुर्मी) और कुश (कुशवाहा) वोटों को साधने के प्रयास के रूप में देखा गया. चौधरी 6 साल पहले बीजेपी में शामिल हुए थे. वे पहले लालू प्रसाद की राजद और नीतीश कुमार की जदयू दोनों से जुड़े रहे.
साल 2017 तक वह भाजपा में शामिल हो गए, जो कुछ ही समय बाद नीतीश कुमार के साथ जुड़ गई. चौधरी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पिछली एनडीए सरकार के दौरान पंचायती राज मंत्री के रूप में भी कार्य किया.
साल 1999 में शुरू हुआ था सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर
परबत्ता से बिहार विधानसभा में उनके दो कार्यकाल रहे हैं. वह राबड़ी देवी सरकार में मंत्री भी रहे. उनका राजनीतिक करियर साल 1999 में शुरू हुआ. साल 2014 में लोकसभा चुनाव में जेडीयू की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद सम्राट चौधरी ने राजद छोड़ दिया और जीतन राम मांझी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए. उनके के पिता अनुभवी राजनीतिज्ञ शकुनी चौधरी राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे.
शकुनी चौधरी खगड़िया से कई बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह समता पार्टी के संस्थापक सदस्य भी रहे, जिससे मूल रूप से नीतीश कुमार जुड़े थे. सम्राट चौधरी की मां पार्वती देवी भी तारपुर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.
बिहार में नई सरकार को लेकर क्या बोले सम्राट चौधरी
राज्य भाजपा प्रमुख सम्राट चौधरी ने कहा कि भाजपा ने ऐतिहासिक काम किया. मुझे विधायक दल का नेता चुना जाना और सरकार का हिस्सा बनना मेरे लिए एक भावनात्मक क्षण है. चौधरी ने कहा कि साल 2020 में जो जनादेश हमें बिहार के विकास और लालू यादव के आतंक को खत्म करने के लिए मिला था, जब बीजेपी को नीतीश कुमार से यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव मिला कि बिहार में कोई जंगल राज न हो तो हमने इसका समर्थन करने का फैसला किया.









