रांची: स्कूल के कार्यक्रम के बाद नाटक मंडली की किडनैपिंग, जंगल में गैंगरेप, प्राइवेट पार्ट को सिगरेट से दागा, हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका की खारिज…

Ranchi: Kidnapping of a drama troupe after a school program, gang rape in the forest, burning of private parts with cigarette, High Court rejects the bail plea of ​​the accused...

हाईकोर्ट ने खूंटी कोचांग गैंगरेप मामले के सजायाफ्ता अजूब सांडी पूर्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने पीड़िता द्वारा पहचान और मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार किया।
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने खूंटी के बहुचर्चित कोचांग गैंगरेप मामले में सजायाफ्ता अभियुक्त अजूब सांडी पूर्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इस मामले की सुनवाई आर. मुखोपाध्याय और पी. के. श्रीवास्तव की खंडपीठ में हुई।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता, ट्रायल के दौरान पीड़िता द्वारा आरोपी की पहचान और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। इसी आधार पर खंडपीठ ने अजूब सांडी पूर्ति की जमानत याचिका खारिज कर दी।

पीड़िता की पहचान और साक्ष्यों को माना अहम
अदालत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि अभियुक्त को टीआई (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन) परेड और ट्रायल के दौरान पीड़िता द्वारा स्पष्ट रूप से पहचाना गया था। यह तथ्य जमानत देने के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आधार बना।राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता भोला नाथ ओझा ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है, जिसमें आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट रूप से साबित हो चुकी है।

2019 में हुई थी आजीवन कारावास की सजा
गौरतलब है कि खूंटी के सिविल कोर्ट ने 17 मई 2019 को इस मामले में अजूब सांडी पूर्ति सहित अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला जून 2018 में हुए सामूहिक दुष्कर्म से जुड़ा है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था।

क्या था कोचांग गैंगरेप मामला?
19 जून, 2018 को कोचांग गांव स्थित मिशनरी स्कूल में मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता के लिए नाटक किया जा रहा था।नाटक दल में कुल 11 सदस्य थे। इनमें पांच महिलाएं, तीन लड़के, एक चालक व आशा किरण संस्था की दो सिस्टर थीं। उन्हें छोटाउली जंगल ले जाया गया। वहां महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। साथ ही, उन्हें गंभीर रूप से शारीरिक यातनाएं दी गईं।शरीर के नाजुक अंगों को सिगरेट से दागा गया। पुरुष पीड़ितों के साथ मारपीट की गई। प्यास लगने पर उन्हें पेशाब पीने को विवश किया गया।

कई आरोपियों को मिली थी सजा
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने इसे बेहद जघन्य अपराध मानते हुए कई आरोपियों को सजा सुनाई थी। इनमें फादर अल्फोंस आइंद, जान जुनास तिडू, बलराम समद, जुनास मुंडा, बाजी समद उर्फ टकला और अजूब सांडी पूर्ति शामिल थे।अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि इस तरह के अपराध कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले हैं और समाज में इनके लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

गंभीर अपराधों में सख्त रुख
हाई कोर्ट के इस फैसले को गंभीर अपराधों के प्रति न्यायपालिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में साक्ष्यों और पीड़िता की पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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