रांची। झारखंड में चुनावी सरगर्मियां चरम पर है। पहले चरण की वोटिंग के बाद अब इंडिया और एनडीए गठबंधन का पूरा फोकर झारखंड की सीटों पर है। इस बीच झामुमो ने एनडीए को झारखंड विरोधी बताते हुए लोकसभा में ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशियों को जीत दिलाने की अपील की है। सोशल मीडिया हैंडल पर झामुमो ने लिखा है कि 12 सीटों पर भाजपा-आजसू को पिछली बार जीत दिलाकर दिल्ली भेजा गया था, लेकिन वो सभी झारखंड के मुद्दे पर चुप्पी साध ली।

झारखंड मुक्ति मोर्चा के पोस्ट को कल्पना सोरेन ने भी रि पोस्ट किया है। पोस्ट में कहा गया है कि पिछले लोकसभा चुनाव में झारखण्ड की जनता ने कुल 𝟭𝟰 में 𝟭𝟮 भाजपा-आजसू नेताओं को दिल्ली भेजा था, मगर झारखण्ड विरोधी लोग 1932 खतियान आधारित स्थानीय और नियोजन नीति को नवीं अनुसूची में डालने की बात पर कान में तेल डालकर सो गए!

सरना आदिवासी धर्म कोड के लिए आवाज नहीं उठाये!

राज्य के पिछड़े वर्ग के लिए 27 प्रतिशत की मांग पर इनके कान सुन्न पड़ गए!

राज्य का ₹1 लाख 36 हजार करोड़ बकाया राशि के लिए एक शब्द नहीं बोले!

राज्य के 8.5 लाख लोगों के आवास के लिए इधर-उधर ताकते रहे!

राज्य के गरीब लोगों को राशन के लिए सरकारी गोदाम से राशन नहीं मिलने पर ठहाके मारते रहे! 🚫DVC की गुंडागर्दी पर चुप रहे। हेमन्त सोरेन की तरह उन्हें आंख नहीं दिखायी!

हो, मुंडारी, और कुड़ुख भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की बात पर बेहोश हो गए!

मॉब लॉन्चिंग रोकने काले कानून और पेपर लीक रोकने वाले कड़े कानून पर घड़ियाली आंसू बहाए! 🚫कोरोना में दुबक कर घर में बैठ कर ताली-थाली बजाते रहे!

झारखण्ड से हो रहे सौतेले व्यवहार पर अपनी बगले झांकते रहे!

हेमन्त सरकार अधिकार मांग रही तो उनके रास्ते पर रोड़े अटकाने का काम करते रहे!

इसलिए झारखण्डवासियों ने भी सौगंध खायी है कि इस बार दिल्ली उन्हीं को भेजा जाएगा जो उनके हक-अधिकार की आवाज उठाएगा, और वह काम सिर्फ INDIA ही कर सकता है।

जय झारखण्ड!

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