झारखंड: महिला डाक्टर ही एंबुलेंस के लिए तरस गयी, ड्यूटी के दौरान हुई थी घायल, पर नहीं मिला एंबुलेंस, प्रभारी पर महिला डाक्टर ने लगाये सनसनीखेज आरोप
Jharkhand: A female doctor longed for an ambulance, she was injured during duty but did not get an ambulance, the female doctor made sensational allegations against the in-charge

Jharkhand News। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था हमेशा सवालों में रहती है, लेकिन ये पहली बार है, जब कोई स्वास्थ्यकर्मी ही अपने विभाग की अमानवीयता का शिकार हो गया है। इस मामले में अब शिकायत स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंच गया है। दरअसल झारखंड में अक्सर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में एंबुलेंस की कमी पर सवाल उठते रहते हैं। लेकिन इस बार खुद स्वास्थ्य विभाग की एक चिकित्सक को ही नाजुक हालात में एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
श्रावणी मेला में घायल हुई थी महिला डाक्टर
ये पूरा प्रकरण दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में चल रहे श्रावणी मेले से जुड़ा है। जहां घायल हुई महिला चिकित्सक ने एंबुलेंस सुविधा नहीं मिलने का मामला उठाया है। पूरा मामला श्रावणी मेला के दौरान का है, जब 29 जुलाई 2025 को बासुकीनाथ धाम के सिंह द्वार के समीप स्वास्थ्य शिविर में ड्यूटी के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर का रेगुलेटर अचानक छिटक गया और चिकित्सक डॉ पूनम बारला की आंख पर जोर से जा टकराया।
इस हादसे में उनकी दाहिनी आंख गंभीर रूप से घायल हो गई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें दुमका के निजी अस्पताल से कोलकाता रेफर कर दिया गया।डॉ पूनम का आरोप है कि शाम 5:30 बजे जब उन्हें जरमुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया तो प्रभारी चिकित्सक डॉ सुनील कुमार सिंह ने एंबुलेंस उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरी में रात 10 बजे उनके भाई निजी वाहन से उन्हें कोलकाता ले गए। अगले दिन सुबह शंकर नेत्रालय, मुकुंदपुर में उनकी सर्जरी की गई।
मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं प्रभारी
यही नहीं डॉ पूनम बारला का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। उनके अनुसार, प्रभारी डॉ सुनील उन्हें बिना रोस्टर आदेश के ड्यूटी पर लगाते हैं और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑक्सीजन सिलेंडर की गुणवत्ता जांच में भी लापरवाही बरती जाती है, जिसके चलते पहले भी हादसे हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आंख की सर्जरी और आगे होने वाले इलाज पर लाखों रुपये खर्च होंगे, जिसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को उठानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने गृह जिला हजारीबाग में तबादले की मांग भी की है।
सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत – डॉ सुनील
वहीं, जरमुंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। उनका कहना है कि गैस लीक गलत तरीके से नॉब खोलने की वजह से हुआ था। उन्होंने खुद प्राथमिक उपचार कराया, आंख का वीडियो आई-स्पेशलिस्ट को भेजा और खुद ही वाहन से दुमका रवाना किया।
डॉ सुनील ने दावा किया कि डॉ पूनम के भाई के आने पर ड्राइवर और पेट्रोल तक उपलब्ध कराया गया। उनके अनुसार, “डॉ पूनम ने खुद कहा था कि एंबुलेंस की जरूरत नहीं है। अब बेवजह मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।”
जांच और विरोध प्रदर्शन
इस मामले को लेकर झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ (झासा) ने भी विरोध प्रदर्शन किया। वहीं विभागीय मंत्री और अपर मुख्य सचिव तक मामला पहुंच गया है। सिविल सर्जन और एसडीओ ने जांच भी शुरू कर दी है।









