झारखंड : बेरोजगारों पर फिर पड़ी मार…शिक्षक भर्ती विवाद ने रोका रास्ता…2034 पदों की फाइल फिर अटकी…जानें क्या है पेच?

Jharkhand: Another Blow to the Unemployed—Teacher Recruitment Dispute Halts the Process; File for 2,034 Posts Stalled Again—Find Out What the Snag Is.

झारखंड में हाईस्कूल शिक्षकों की भर्ती को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। 2016 में शुरू हुई स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं हो सकी है। राज्य में 2034 पद खाली हैं और हजारों उम्मीदवार लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश भी बेअसर

1 सितंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि इन रिक्त पदों को याचिकाकर्ताओं से भरा जाए। अदालत ने अभ्यर्थियों को 8 सप्ताह के भीतर दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया था। सभी उम्मीदवारों ने तय समय में औपचारिकताएं पूरी कर दीं, लेकिन करीब 6 महीने गुजरने के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

अवमानना याचिका से बढ़ा दबाव

लंबे इंतजार से नाराज अभ्यर्थियों ने अब कानूनी रास्ता अपनाया है। मनोज कुमार गुप्ता के नेतृत्व में 200 से अधिक उम्मीदवारों ने अदालत में अवमानना याचिका दाखिल की है। उनका आरोप है कि स्पष्ट आदेश के बावजूद संबंधित एजेंसी ने कार्रवाई नहीं की।

जांच समिति पर भी अटका फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने रिटायर्ड जस्टिस डॉ. एसएन पाठक की अध्यक्षता में एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्देश दिया था। कमेटी को 3 महीने में रिपोर्ट देने और सरकार को 6 सप्ताह में निर्णय लेने के लिए कहा गया था। साथ ही 6 महीने में पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त करने का निर्देश था। हालांकि, डॉ. एसएन पाठक ने समिति की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया, जिससे प्रक्रिया फिर अटक गई।

सरकार और आयोग ने उठाए सवाल

राज्य सरकार और जेएसएससी ने अदालत के आदेश पर ही आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि निर्देशों में कई विसंगतियां हैं, इसलिए उन्हें चुनौती दी गई है। फिलहाल इस आदेश पर कोई रोक नहीं लगी है, लेकिन स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।

पुराने विवाद की जड़ क्या है

यह पूरा मामला 2016 की शिक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें 17,786 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। मेरिट सूची जारी होने के बाद जिला और राज्य स्तर के अलग अलग मानकों के कारण कई योग्य उम्मीदवार नियुक्ति से वंचित रह गए। इसी मुद्दे को लेकर मामला अदालत पहुंचा था।

शिक्षा व्यवस्था पर दिख रहा असर

2034 पदों के खाली रहने से स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि समय पर नियुक्ति होती, तो शिक्षा व्यवस्था की स्थिति कहीं बेहतर होती।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय है। अभ्यर्थियों से लेकर प्रशासन तक, सभी की निगाहें अदालत के अगले फैसले पर हैं। यह विवाद एक बार फिर सरकारी भर्तियों की धीमी प्रक्रिया और उसके प्रभावों पर सवाल खड़े कर रहा है।

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