झारखंड- जिला कोर्ट का बड़ा फैसला, दो भाईयों को कोर्ट ने दी 10-10 साल की सजा, 50-50 हजार का लगाया जुर्माना, जानिये क्या है मामला

Palamu human trafficking case: Two brothers sentenced to 10 years each and fined Rs 50,000

पलामू। कोर्ट ने दो भाईयों को 10-10 साल की सजा सुनायी है। यही नहीं, दोनों को कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया है। मामला पलामू जिले का है, जहां जिला न्यायालय ने मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में ये बड़ा फैसला सुनाया है। दोनों सगे भाइयों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में एक-एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।



यह मामला वर्ष 2017 में एक नाबालिग के रहस्यमय ढंग से गायब होने से जुड़ा है। जिला एवं सत्र न्यायालय-09 ने लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के बासडीह चौरा गांव निवासी दो सगे भाइयों, एलन पांडेय और मिथिलेश पांडेय, को मानव तस्करी का दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा अदालत ने दोनों अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि जुर्माने की राशि अदा नहीं की जाती है तो दोनों को एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।

यह मामला वर्ष 2017 का है, जब लेस्लीगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला एक नाबालिग मजदूरी के लिए दिल्ली जाने के दौरान लापता हो गया था। परिजनों के अनुसार, एलन पांडेय और मिथिलेश पांडेय ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ काम दिलाने के बहाने ले जाने की बात कही थी। लेकिन दिल्ली जाने के दौरान ही वह नाबालिग रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया। परिजनों ने जब बच्चे के बारे में पूछताछ की तो दोनों अभियुक्तों ने कोई संतोषजनक जानकारी नहीं दी, जिससे संदेह और गहराता चला गया।

नाबालिग के अचानक लापता होने के बाद परिजनों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसी क्रम में वर्ष 2017 में जब लेस्लीगंज थाना क्षेत्र में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) थाना की स्थापना हुई, तब यह मामला उस यूनिट में दर्ज होने वाला पहला एफआईआर बना। इस केस को मानव तस्करी से जोड़ते हुए गंभीरता से जांच शुरू की गई।

तत्कालीन एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दुलर चौड़े को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इंस्पेक्टर दुलर चौड़े, जो वर्तमान में लातेहार जिले में पदस्थ हैं, ने बताया कि नाबालिग की तलाश के लिए उस समय हर संभव प्रयास किए गए थे। उत्तर प्रदेश के लगभग सभी जिलों की पुलिस से संपर्क कर नाबालिग की जानकारी साझा की गई थी। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई थी कि नाबालिग कानपुर और इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के बीच कहीं गायब हुआ था।

नाबालिग को खोजने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और अन्य एजेंसियों की भी मदद ली गई। तकनीकी साक्ष्यों, यात्रा मार्गों और संदिग्ध गतिविधियों की गहन जांच की गई, लेकिन नाबालिग का कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका। इस दौरान अभियुक्तों से लगातार पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने बच्चे के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की।

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