“झारखंड हाई कोर्ट का हथौड़ा! डैम और नदियों की जमीन पर बने अवैध निर्माण ढहाने का आदेश, भू-माफियाओं में हड़कंप
Jharkhand High Court's hammer! Order to demolish illegal constructions on dam and river land, causing panic among land mafia

रांची स्थित झारखंड हाइकोर्ट ने जलाशयों, नदियों और डैम के कैचमेंट एरिया में हुए अतिक्रमण को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। Jharkhand High Court Action के तहत अदालत ने साफ कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी परिस्थिति में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने राज्य पुलिस को ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने और जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से कराने का निर्देश दिया है।
अवैध दस्तावेजों पर बने निर्माण पर कड़ी टिप्पणी
हाइकोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर जलस्रोतों के अतिक्रमण और उनकी सफाई से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए खंडपीठ ने कहा कि जब किसी निर्माण का आधार ही अवैध हो, तो उस पर खड़ा पूरा ढांचा स्वतः अवैध हो जाता है। ऐसे निर्माणों को संरक्षण देना कानून के खिलाफ है।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
Jharkhand High Court Action के दौरान अदालत ने उन अधिकारियों पर भी सख्त टिप्पणी की, जिन्होंने अधिग्रहित सरकारी भूमि पर रजिस्ट्री, म्यूटेशन, रेंट रसीद या भवन नक्शा स्वीकृत किया। कोर्ट ने इसे सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग मानते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया।
PIL और जांच का दायरा
बड़ा तालाब अतिक्रमण मामले में खुशबू कटारूका और कांके, रुक्का व धुर्वा डैम से जुड़े मामलों में राजीव कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जलस्रोतों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
अतिक्रमण हटाने का खर्च भी अतिक्रमणकारियों से
हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने पर होने वाला पूरा खर्च अतिक्रमणकारियों से ही वसूला जाएगा। साथ ही राज्य सरकार और नगर निगमों को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।



















