झारखंड : पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक….इन मुद्दों पर होगी चर्चा, अमित शाह की अध्यक्षता में होंगे महत्वपूर्ण निर्णय

रांची के होटल रेडिसन ब्लू में आज पूर्वी क्षेत्रीय परिषद् की बैठक होगी. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे. इस बैठक में चार राज्य झारखंड पश्चिम बंगाल, ओडिशा व बिहार के मुख्यमंत्री तथा अधिकारी शामिल होंगे. झारखंड से शामिल होने वालों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा दो अन्य मंत्री सहित 15 सदस्यीय टीम शामिल होगी. इस पूर्वी क्षेत्रीय परिषद् की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा किया जाएगा.

मसानजोर बांध के पानी का बंटवारा वॉल्यूमेट्रिक के आधार पर हो

मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड सरकार ने संताल परगना के दुमका स्थित मसानजोर बांध के पानी का बंटवारा वॉल्यूमेट्रिक के आधार पर करने की मांग की है. राज्य सरकार के अनुसार डैम के 767 मिलियन क्यूबिक मीटर में से झारखंड को केवल 53 एमसीएम जल मिल रहा है, जबकि आवश्यकता 457 एमसीएम की है.

इसी तरह बाणसागर समझौते के तहत संयुक्त बिहार को सोन नदी के 7.75 मिलियन एकड़ फीट में से अतिरिक्त 2.75 एमएएफ जल मिलना चाहिए. उपरोक्त दोनों ही प्रस्ताव जल संसाधन विभाग का है.

दरअसल मयूराक्षी बांध और इंद्रपुरी जलाशय परियोजना निर्माण के मुद्दे को लेकर झारखंड सरकार का क्रमशः पश्चिम बंगाल और बिहार राज्य के साथ वर्षों पुराना विवाद है. इन विवादों पर गुरुवार को होने वाली पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (ईआरसी) की बैठक में विशेष बातचीत हो सकती है.

इसके अलावा मसानजोर डैम का पूरा जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट) और सबमर्जेंस एरिया झारखंड में स्थित है. ऐसे में झारखंड सरकार ने वर्ष 1978 के समझौते में तीन तरह के संशोधित करने का अनुरोध किया है.

बता दें कि वर्ष 12 मार्च 1949 में पश्चिम बंगाल एवं तत्कालीन बिहार राज्य के बीच मयूराक्षी बांध समझौते (12 मार्च 1949) के अंतर्गत 19 जुलाई 1978 को एक पूरक समझौता हुआ, जो मसानजोर डैम निर्माण को लेकर था. यह डैम बिहार (अब झारखंड) में 8100 हेक्टेयर में खरीफ और 1050 हेक्टेयर रबी और पश्चिम बंगाल (2,26,720 खरीफ और 20,240 हेक्टेयर रबी) में सिंचाई के लिए निर्मित था.

पलामू प्रमंडल क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार ने सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर संयुक्त बिहार को मिले 7.75 एमएएफ जल में अतिरिक्त 2.75 एमएएफ जल देने की मांग की है. तीन राज्यों यथा (बिहार, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) के बीच वर्ष 1973 में हुए बाणसागर समझौते के तहत सोन नदी के जल का बंटवारा हुआ था.

2004 में बनी थी संयुक्त समिति 

इसमें एकीकृत बिहार को 7.75 एमएएफ और 14.25 एमएएफ में से मध्य प्रदेश को 5.25 और उत्तर प्रदेश को 1.25 एमएएफ जल मिला था. बिहार एवं झारखंड में जल बंटवारे को लेकर वर्ष 2004 में संयुक्त समिति बनी थी, जिसमें बिहार को 6.25 एमएएफ और झारखंड को 1.5 एमएएफ देने का प्रस्ताव बना था.

झारखंड सरकार की इस पर असहमति है. झारखंड के अनुसार राज्य को 3.03 एमएएफ जल की आवश्यकता है. ऐसे में बिहार को पूर्व में मिले 7.75 में से 2.75 एमएएफ जल झारखंड को मिलना चाहिए. वहीं, संयुक्त बिहार को मिले कुल 7.75 एमएएफ में से 5 एमएएफ पुराने सोन कैनाल सिस्टम को आवंटित है. शेष 2.75 एमएएफ बिहार और झारखंड के मध्य विभाजित किया जाना है. बिहार पूर्व में बने इंद्रपुरी बराज के अपस्ट्रीम में एक जलाशय बनाना चाहता है.

पलामू का क्षेत्र सूखे की चपेट में आते रहता है

जिसे पहले खदवान और बाद में इंद्रपुरी के नाम से जाना गया है. इसका उद्देश्य मॉनसून का जल रोकना और सोन कैनाल सिस्टम को स्थायित्व देना है. मालूम हो कि पलामू के क्षेत्र अक्सर सूखे की चपेट में आते हैं. सोन नदी के जल मिलने से इस स्थिति से कुछ हद तक निजात मिलेगी, साथ ही कृषि की उन्नति में भी सहायता मिलेगी.

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