झारखंड : बाबूलाल मरांडी के नाम पर लग सकती है मुहर…दिल्ली चुनाव के बाद झारखंड भाजपा को मिलेगा नेता प्रतिपक्ष

झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार तो बन गई विधानसभा का विशेष सत्र भी हो गया, लेकिन अब तक विपक्षी पार्टी भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष नहीं चुना. अगले महिने यानी फरवरी में झारखंड विधानसभा में बजट सत्र की शुरुआत होने वाली है ऐसे में सभी के मन में कौतुहल है कि बजट सत्र तक भी भाजपा अपना नेता प्रतिपक्ष चुन पाएगी या नहीं.

झामुमो ने कसा तंज

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झामुमो कई बार इस मामले में भाजपा पर तंज भी कस चुकी है. पार्टी प्रवक्ता डॉ तनुज खत्री ने कुछ दिनों पहले भाजपा पर हमला बोला था. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर बीजेपी पर तंज कसते हुए लिखा है कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी झारखंड में अपना विधानसभा का नेता सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बनाएगी. अहंकार कहां से कहां ले जाता है. इसलिए अहंकार नहीं पालना है दोस्त, चाहे आप कोई भी हो.

वहीं झामुमो साहिबगंज ने भी अपने ट्वीट में एक अखबार का कतरन शेयर करते हुए कहा था कि आपको अभी तक समझ नही आ रहा कि झारखंड की जनता ने आपको सिरे से नकार दिया है. फिर भी आप ले देकर कूटनीति वाली राजनीति कर रहे हैं. यह अबुआ सरकार जो कहती है वो करती है. पहले अपने पार्टी का नेता प्रतिपक्ष ढूंढ लो. फिर बात करना भाई.

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बाबूलाल मरांडी का नाम आगे

अब भाजपा नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर सीरियस मूड में नजर आ रही है. माना जा रहा है दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा झारखंड में नेता प्रतिपक्ष का चुनाव कर सकती है. नेता प्रतिपक्ष के नाम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी का नाम अब तक सबसे आगे है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इनके नाम की घोषणा भी जल्द ही की जा सकती है। इसके साथ ही विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक और सचेतक कौन होगा यह भी साफ हो जाएगा। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बाबूलाल मरांडी की बैठक भी हो चुकी है। वैसे नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में रांची विधायक सीपी सिंह भी हैं, पर मरांडी का नाम अभी आगे है।

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सूत्रों के मुताबिक संभावना है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद विधायक दल के नेता चयन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त होगा। पर्यवेक्षक ही रांची आकर नेता प्रतिपक्ष के नाम को अंतिम रूप देगा। बताया जा रहा है कि गढ़वा विधायक सत्येंद्र तिवारी, हटिया विधायक नवीन जायसवाल या कोडरमा विधायक नीरा यादव में से किसी एक को विधानसभा में पार्टी का मुख्य सचेतक और किसी एक को सचेतक बनाया जा सकता है।
नेता प्रतिपक्ष, सचेतक और प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के सोशल इंजीनियरिंग की परीक्षा होगी। बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने के बाद पार्टी ओबीसी और सामान्य जाति के नेताओं को शेष पदों के लिए नियुक्त करेगी।

कई विधायकों की खलेगी कमी

सरकार गठन के बाद विधानसभा का विशेष सत्र बिना नेता प्रतिपक्ष के बीता। पिछली सरकार में भी नेता प्रतिपक्ष का पद लंबे समय तक खाली रहा। जिस वजह से चर्चाएं भी होती रही। पर इस बार ऐसा नहीं होगा। चूंकि प्रतिपक्ष की संख्या कम है। सदन में अनंत ओझा, बिरंची नारायण, अमर कुमार बाउरी, रणधीर सिंह जैसे मुखर नेताओं की गैरमौजूदगी भी है।

ऐसे में भाजपा के पास बाबूलाल मरांडी जैसे सीनियर लीडर का बेहतर विकल्प है। वहीं भाजपा सदन के भीतर ओबीसी और सामान्य जातियों को भी जगह देने का प्रयास पार्टी करेगी। अगर नीरा यादव को सचेतक बनाया जाता है तो इससे महिलाओं को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। वहीं भाजपा सदन के भीतर सामाजिक समीकरण भी साधे रखेगी।

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