हजारीबाग। पति को गये हुए 22 साल गुजर गये थे…लेकिन उसे यकीन था, आज ना कल उसे उसका पति जरूर मिलेगा। फिर, वहीं हुआ जिसका इंतजार बसंती 22 साल से कर रही थी। हजारीबाग के खंभवा की बसंती ने अपने पति को 22 साल बाद खोज निकाला। हालांकि जब पति उसे मिला तो उसने अपनी घर बसा ली थी, उसने शादी की थी। हालांकि अब पति तैयार है कि वो दोनों पत्नियों को साथ रखेगा। संती पिछले 22 दिसंबर को शिव चर्चा में वर्द्धमान गयी थी। वहीं उसकी मुलाकात अपने बिछड़े पति से हुई। समझौता के साथ वह उसे लेकर अपने घर आ गई है।

जानकारी के मुताबिक खंभवा के कालदेव और रामजी दो भाई थे। कालदेव राम की शादी बसंती से हुई थी। कालदेव रोजगार की तलाश में कोलकाता गया था। वहां से फिर वह लौटकर नहीं आया। बाद में पता चला कि कोलकाता में ही उसकी मृत्यु हो गई। कुछ दिन बाद बसंती ने अपने ही देवर रामजी राम से शादी कर ली। रामजी राम से उसे दो बेटे और एक बेटी हुई।

इधर, रामजी का कोलकाता में ही किसी लड़की से प्रेम हो गया और फिर वह वर्ष 2000 में खंभवा छोड़कर भाग गया। तब से उसकी पत्नी लगातार उसकी खोज में भटक रही थी। बसंती भी मजदूरी कर अपने बाल-बच्चों को लालन-पालन करने लगी। इस दौरान बसंती शिव चर्चा करने वाले आध्यात्मिक समूह से जुड़ गई। इस समूह का वर्द्धमान के शिवमंदिर में कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बसंती भी वर्द्धमान पहुंची। यहां शिव मंदिर में चल रही शिवचर्चा के दौरान ही उसने अपने पति रामजी राम को देखा और पहचान लिया।

रामजी राम ने भी उसे पहचाना और इसके बाद दोनों ने वहीं घंटों बैठकर अपना दुख -सुख साझा किया। इसके बाद उसने अपनी सौतन गीता से भी बात की। बसंती ने गीता को अपने साथ रखने का आश्वासन देकर पति को 22 वर्ष बाद ले आयी।