हेमंत Vs हिमंता: हेमंत सरकार के फैसले के जवाब में हिमंता का डबल अटैक, 5 दिसंबर को हिमंता कैबिनेट में लेने वाले हैं झारखंड को लेकर बड़ा फैसला

Hemant Vs Himanta: Himanta's double attack in response to the government's decision, Himanta is going to take a big decision regarding Jharkhand in the cabinet on December 5.

Hement Soren Vs Himanta Biswa Sarma: चुनाव भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन अभी भी हेमंत सोरेन बनाम हिमंता बिस्वा सरमा खत्म नहीं हुआ है। पहली ही कैबिनेट में हेमंत सोरेन ने बड़ा दांव चलते हुए असम में झारखंड सरकार के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को भेजने का फैसला लिया, तो अब हिमंता बिस्वा सरमा ने ऐलान किया है कि वो भी झारखंड में असम सरकार के दो प्रतिनिधिमंडल को भेजेगी।

5 दिसंबर को हिमंता बिस्वा सरमा कैबिनेट की बैठक होने वाली है। हिमंता बिस्वा सरमा इसी कैबिनेट में दोनों मुद्दे और प्रतिनिधिमंडल के बारे में फैसला लेंगे। आपको बता दें कि झारखंड सरकार के असम में सर्वदलीय टीम भेजने के जवाब में असम सरकार ने अपनी टीम भेजने का ये फैसला लिया है।

मीडिया से बातचीत में हिमंता ने कहा कि असम सरकार अपने दो प्रतिनिधिमंडल को जल्द झारखंड भेजेगी। हम 5 दिसंबर को होने वाली कैबिनेट मीटिंग में टीम भेजने पर निर्णय लेंगे। वो हमारी टीम राज्य में दो चीजों की जांच करेगी। कैबिनेट में हमलोग फैसला लेंगे और कमेटी पर निर्णय लेंगे।

आपको बता दें कि हेमंत सोरेन ने पहली कैबिनेट बैठक में असम के चाय बगानों में काम करने वाले आदिवासियों की दशा पर अध्ययन करने के लिए एक सर्वदलीय टीम गठित कर भेजने का निर्णय लिया था। असम की करीब 40 विधानसभा सीटों पर टी ट्राइब्स वोटरों की संख्या ठीक ठाक है।

टी ट्राइब्स मतलब- चाय बागानों में काम करने वाले झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के लोग। इसमें अधिकतर संथाली जनजाति के लोग हैं, जिनका मूल झारखंड से है।असम में वोटरों को लुभाने के लिए कांग्रेस और भाजपा झारखंड के नेताओं का इस्तेमाल करती रही है। असम में करीब 20 लाख संथाली जनजाति के लोग हैं।

दावा किया जा रहा है कि उन वोटरों का प्रभाव करीब 20 विधानसभा सीटों पर है। इसमें से 10 सीटों पर तो उनकी संख्या निर्णायक हैं। असम में इससे पहले भी संथाली जनजाति से केंद्रीय मंत्री और मंत्री रह चुके हैं। हेमंत सोरेन भी संथाली ही हैं। इस कारण वहां वह दांव चल रहे हैं। ताकि हिमंता को जवाब दिया जा सके। ऐसे में 5 दिसंबर को हिमंता कैबिनेट पर झारखंड सरकार की भी नजर होगी।

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