झारखंड हाई कोर्ट में PESA Rules पर सुनवाई, कैबिनेट से मांगी जानकारी…Sand Mining पर रोक बरकरार…जानिए पूरा मामला और क्या है आगे की रणनीति!
Hearing on PESA Rules in Jharkhand High Court, information sought from Cabinet...ban on Sand Mining continues...know the whole matter and what is the future strategy!

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA Act) के तहत नियमावली लागू करने में देरी पर दाखिल अवमानना याचिका की सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत को बताया कि संशोधित पेसा नियमावली ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, जिसमें सभी संबंधित विभागों के सुझाव शामिल किए गए हैं। इसे अब कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कैबिनेट के निर्णय की जानकारी अगली सुनवाई में दी जाए।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 13 नवंबर तय की और राज्य में लघु खनिजों व बालू घाटों के आवंटन पर लगी अंतरिम रोक को अगले आदेश तक जारी रखने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान पंचायती राज विभाग के सचिव भी कोर्ट में मौजूद रहे।
क्या है मामला?
केंद्र सरकार ने वर्ष 1996 में PESA कानून लागू किया था, जिसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना है। हालांकि, झारखंड में इस कानून के तहत नियमावली अब तक लागू नहीं हो पाई है। वर्ष 2019 और 2023 में नियमावली का ड्राफ्ट तैयार हुआ, लेकिन लागू नहीं किया गया। इस पर दायर जनहित याचिका के बाद 29 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो माह के भीतर नियमावली लागू करने का निर्देश दिया था।









