झारखंड: “निकलना था जीत का जुलूस, निकालना पड़ा जनाजा” जीत की खबर के तुरंत बाद घर पर टूटा दुखों का पहाड़, विजयी प्रत्याशी के घर निकली दो-दो मैयत
Jharkhand: "A victory procession was supposed to take place, but a funeral procession ended." Immediately after the news of victory, a mountain of sorrow fell upon the family, with two bodies arriving at the winning candidate's home.

चुनाव में जीत की खुशियां अभी शुरू भी नहीं हुई थी, कि प्रत्याशी के घर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जीत के जश्न की तैयारी के बीच चक्रधरपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर 18 से नव-निर्वाचित पार्षद मोहम्मद नूरुद्दीन के घर एक साथ दो रिश्तेदारों की मौत हो गयी। शनिवार को दोनों का जनाजा एक साथ निकाला गया, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए।
Nagar Niikay Election Result : जीत का जुलूस निकलना था, लेकिन मौत का जनाजा निकालना पड़ा। जीत की खुशियों के बीच विजेता के घर एक साथ दो-दो अर्थियां निकली। पूरा मामला चक्रधरपुर नगर परिषद चुनाव के नतीजे से जुड़ा है। वार्ड संख्या-18 से नव-निर्वाचित पार्षद मोहम्मद नूरुद्दीन के लिए यह जीत कुछ ही घंटों में गहरे मातम में बदल गई। दरअसल 27 फरवरी को चाईबासा में मतगणना के दौरान जब उन्हें मात्र 18 वोटों के बेहद कम अंतर से जीत की सूचना मिली, उसी समय एक और दुखद खबर ने उन्हें झकझोर दिया।
उनकी मामी हसीना बेगम (50 वर्ष) का इंतकाल हो गया था। जीत की घोषणा के बाद जहां समर्थक जश्न की तैयारी कर रहे थे, वहीं यह खबर मिलते ही नूरुद्दीन ने सभी उत्सव कार्यक्रम तत्काल रद्द कर दिए। न पटाखे फोड़े गए, न मिठाइयां बांटी गईं और न ही किसी तरह की नारेबाजी हुई।प्रमाण पत्र लेने के बाद वे सीधे घर लौट आए और मामी के जनाजे की तैयारी में जुट गए।
परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि शुक्रवार देर रात लगभग 1 बजे एक और हृदयविदारक घटना घटी। उनके मामा मोहम्मद मुख्तार (58 वर्ष), जो अपनी पत्नी के जनाजे के पास बैठकर दुआ और वजीफा पढ़ रहे थे, अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत करने लगे। कुछ ही पलों में उन्हें हार्ट अटैक आया और उनका भी इंतकाल हो गया।
पति-पत्नी की कुछ ही घंटों के अंतराल में हुई मौत से पूरा शहर स्तब्ध रह गया। सेहरी के समय तक यह खबर आग की तरह फैल गई और लोगों का तांता उनके घर पर लग गया। जीत की खुशी में डूबा परिवार अचानक दोहरी क्षति के गहरे शोक में डूब गया।
शनिवार सुबह 10 बजे मामी का जनाजा निकलना तय था, लेकिन मामा के भी निधन के बाद समय में बदलाव किया गया। सुबह 11 बजे दोनों का जनाजा एक साथ निकाला गया। आगे-आगे पति और पीछे पत्नी का जनाजा ले जाया जा रहा था।
मुस्लिम कब्रिस्तान बांग्लाटांड में दोनों की नमाज-ए-जनाजा अदा की गई और उन्हें सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। अंतिम यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी। हर आंख नम थी और हर जुबां पर दुआएं थीं।मोहम्मद नूरुद्दीन ने बताया कि मतगणना हॉल में ही मामी के इंतकाल की सूचना मिली थी।
उन्होंने तुरंत सभी जश्न कार्यक्रम रद्द कर दिए और घर लौट आए। देर रात मामा से इजाजत लेकर वे अपने घर गए थे, लेकिन थोड़ी ही देर में मामा के निधन की खबर मिल गई। उन्होंने कहा कि इस दोहरी क्षति ने उन्हें, उनके परिवार और समर्थकों को अंदर तक झकझोर दिया है।









