आसमान में उड़ी दोस्ती, जमीन पर सियासत की गूंज! अहमदाबाद में पीएम मोदी और जर्मन चांसलर की पतंग ने खींची दुनिया की नजरें

हनुमान वाली पतंग, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश और साबरमती किनारे उमड़ा जनसैलाब—क्या ये सिर्फ उत्सव था या किसी बड़े संकेत की शुरुआत?

अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर सोमवार को नज़ारा कुछ अलग ही था। रंग-बिरंगी पतंगों से भरा आसमान, ढोल-नगाड़ों की गूंज और हजारों आंखें दो खास शख्सियतों पर टिकी हुईं—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज। मौका था अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का, लेकिन माहौल में उत्सव के साथ-साथ एक रहस्यमयी गंभीरता भी महसूस की जा रही थी।

पतंग उड़ाने के दौरान दोनों नेताओं के हाथों में भगवान हनुमान की तस्वीर वाली पतंग दिखी, जिसने देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा और कौतूहल पैदा कर दिया। वहीं पीएम मोदी को ‘भारत – वसुधैव कुटुम्बकम’ संदेश वाली विशेष पतंग उड़ाते हुए देखा गया—जो भारत की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें पूरी दुनिया एक परिवार है।

पहली भारत यात्रा, पहला सांस्कृतिक संदेश

यह जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। ऐसे में पतंग महोत्सव जैसे सांस्कृतिक आयोजन में उनकी मौजूदगी को केवल एक रस्म नहीं माना जा रहा। पारंपरिक गुजराती स्कार्फ पहनाकर उनका स्वागत किया गया, लोक नृत्य और संगीत ने माहौल को और खास बना दिया।

साबरमती किनारे भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोग भारतीय और जर्मन झंडे लहराते दिखे। ऐसा लग रहा था मानो यह उत्सव सिर्फ पतंगों का नहीं, बल्कि दो देशों की दोस्ती के नए अध्याय का भी हो।

पतंग के बाद पर्दे के पीछे बड़ी बैठक

उत्सव के बाद पीएम मोदी और चांसलर मर्ज के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई, जिसमें NSA अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद रहे। सवाल उठने लगे—क्या पतंग उड़ाने की यह तस्वीरें किसी बड़ी कूटनीतिक रणनीति का सॉफ्ट संकेत थीं?

दोनों नेता गांधीनगर के महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर में भी बातचीत करेंगे, जहां व्यापार, निवेश, तकनीक, शिक्षा, रक्षा, हरित विकास और वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के मौके पर यह मुलाकात और भी अहम मानी जा रही है।

गांधी की भूमि से दुनिया को संदेश

महोत्सव से पहले दोनों नेता साबरमती आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। जर्मन चांसलर ने विजिटर्स बुक में अपनी भावनाएं भी दर्ज कीं। गांधी की भूमि से उठता यह संदेश—शांति, सहयोग और साझेदारी—आज के वैश्विक तनावों के बीच खास मायने रखता है।

क्यों खास है अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव?

मकर संक्रांति से ठीक पहले शुरू हुआ यह तीन दिवसीय महोत्सव 14 जनवरी को समाप्त होगा। इसमें 50 देशों के 135 अंतरराष्ट्रीय पतंग प्रेमी, भारत के 65 राष्ट्रीय और गुजरात के 871 स्थानीय प्रतिभागी शामिल हुए हैं। उत्तरायण के मौके पर होने वाला यह उत्सव सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक ताकत का वैश्विक प्रदर्शन है।

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