झारखंड में फर्जी लैब टेक्निशियन: सरकारी अस्पताल में चल रहा था गजब का फर्जीवाड़ा, अस्पताल अधीक्षक ने खुद पकड़ा फर्जी लैब टेक्निशियन को… जांच के आदेश

Fake lab technician in Jharkhand: A huge fraud was going on in the government hospital, the hospital superintendent himself caught the fake lab technician... orders for investigation

जमशेदपुर। …अब तक तो हमलोग फर्जी डाक्टर, फर्जी पुलिस, फर्जी अधिकारी के बारे में ही सुनते थे, लेकिन झारखंड में एक गजबक मामला सामने आया है, जहां एक फर्जी लैब टेक्निशियन का खुलासा हुआ है। जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ये फर्जीवाड़ा सामने आया है।

 

दरअसल अस्पताल के नए भवन स्थित कक्ष संख्या 134 में एक युवक बिना किसी अधिकृत अनुमति के यूरोफ्लोमेट्री और रक्त जांच कर रहा था। अधीक्षक डॉ. आरके मंधान ने खुद इस युवक को रंगे हाथों पकड़ लिया। पूछताछ में युवक ने अपना नाम मोबिन बताया और खुलासा किया कि उसे यह कमरा एक नर्स ने चाबी देकर उपलब्ध कराया था।

 

मोबिन ने यह भी बताया कि वह पहले पुराने भवन के मेडिसिन विभाग के पास बैठकर मरीजों की जांच करता था और अब नए भवन में आकर निशुल्क जांच के नाम पर ठगी कर रहा था।एक मरीज के परिजन की शिकायत पर मामला खुला, जिसमें बताया गया कि मोबिन ने 300 रुपये लेकर ब्लड सैंपल तो लिया, लेकिन रिपोर्ट नहीं सौंपी।

 

इसी शिकायत पर जब अधीक्षक ने 134 नंबर कक्ष में छापा मारा, तो पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया।मोबिन ने यह भी कबूला कि एक अन्य युवक जो खुद को ‘थायरोकेयर’ से जुड़ा बताता था, मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर चला जाता था और पैसे वसूलता था।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल में कोई बाहरी व्यक्ति बिना नियुक्ति के कैसे लगातार जांच कर सकता है? अधीक्षक ने इस मामले में अस्पताल के कुछ डॉक्टर, नर्स और कर्मचारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया है।उन्होंने जांच का जिम्मा उपाधीक्षक डॉ. जुझार माझी को सौंपा है, जिन्होंने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

 

फिलहाल 134 नंबर कक्ष को तत्काल खाली कराया गया है और मोबिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।यूरोफ्लोमेट्री एक मेडिकल जांच होती है जिसमें पेशाब के प्रवाह और मात्रा को मापा जाता है। यह जांच आमतौर पर यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याओं को पहचानने के लिए होती है और इसे प्रशिक्षित तकनीशियन या डॉक्टर की निगरानी में ही किया जाना चाहिए।

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