अंग्रेजों की तोपें भी बेबस रहीं! भारत के वो किले जिन्हें जीतना ब्रिटिश हुकूमत के बस की बात नहीं थी

जहां हर हमला टूटा, हर साजिश नाकाम हुई—इन अभेद्य किलों ने आज़ादी से पहले ही दिखा दी थी भारत की ताकत

नई दिल्ली। भारत की धरती सिर्फ मंदिरों और संस्कृति की नहीं, बल्कि अजेय शौर्य और अदम्य साहस की भी गवाह रही है। अंग्रेजों ने पूरे देश पर कब्जा करने के लिए हर हथकंडा अपनाया, लेकिन कुछ किले ऐसे थे, जिनके सामने ब्रिटिश सेना की ताकत भी घुटने टेकने को मजबूर हो गई। इन किलों को न तो तोपों से तोड़ा जा सका, न चालों से जीता जा सका। आइए जानते हैं भारत के उन अपराजेय किलों के बारे में, जिनका नाम सुनते ही आज भी सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।



 लोहागढ़ किला – सचमुच लोहे से बना किला

राजस्थान का लोहागढ़ किला अपने नाम की तरह ही मजबूत साबित हुआ।

  • 1805 में ब्रिटिश जनरल लॉर्ड लेक ने इस किले पर पांच बार हमला किया

  • भारी तोपों से गोले दागे गए

  • लेकिन किले की दीवारें टस से मस नहीं हुईं

हर नाकाम हमले के बाद अंग्रेजों को पीछे हटना पड़ा। यह किला अंग्रेजों के लिए एक खुली चुनौती बन गया था।

 मुरुद जंजीरा – समुद्र के बीच अडिग शेर

अरब सागर की चट्टान पर बना मुरुद जंजीरा किला चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है।

  • अंग्रेज, पुर्तगाली, डच और मराठा—सबने कोशिश की

  • लेकिन कोई भी इसे जीत नहीं पाया

सबसे बड़ी बात—
👉 यह किला 1947 में आज़ादी तक कभी गुलाम नहीं हुआ

जूनागढ़ किला – मैदान में खड़ा, फिर भी अजेय

ज्यादातर किले पहाड़ियों पर बने होते हैं, लेकिन जूनागढ़ किला समतल जमीन पर खड़ा है।
इसके बावजूद—

  • मोटी दीवारें

  • कई लेयर की सुरक्षा

  • जटिल प्रवेश द्वार

ब्रिटिश सेना कई बार कोशिश के बावजूद इसे सैन्य रूप से कभी जीत नहीं पाई

 कुंभलगढ़ – भारत की महान दीवार

राजस्थान का कुंभलगढ़ किला अपनी

  • 36 किलोमीटर लंबी दीवार

  • ऊंचाई

  • संकरे प्रवेश द्वार

की वजह से दुश्मनों के लिए एक बुरा सपना बना रहा। दुनिया की सबसे लंबी दीवारों में गिनी जाने वाली यह संरचना हमलावरों को हमेशा बाहर ही रोक देती थी

मेहरानगढ़ – जहां ताकत नहीं, समझौता चला

जोधपुर का मेहरानगढ़ किला लड़ाई में कभी नहीं जीता गया

  • खड़ी चट्टानें

  • विशाल दीवारें

  • गुप्त दरवाजे

अंग्रेज समझ गए कि इसे बल से जीतना नामुमकिन है, इसलिए उन्हें संधि करने पर मजबूर होना पड़ा

जैसलमेर किला – रेगिस्तान का जिंदा शहर

थार रेगिस्तान के बीच खड़ा जैसलमेर किला सिर्फ किला नहीं, बल्कि एक जिंदा शहर है।

  • मजबूत भूगोल

  • स्थानीय गठबंधन

  • व्यापार मार्गों पर नियंत्रण

इन सब वजहों से यह किला हमेशा अंग्रेजों की पहुंच से बाहर रहा। आज भी लोग इसकी दीवारों के भीतर रहते हैं।

 इतिहास नहीं, स्वाभिमान की कहानी

ये किले सिर्फ पत्थरों की इमारत नहीं हैं, बल्कि वो गवाह हैं कि
भारत को जीतना कभी आसान नहीं था।
अंग्रेजों की ताकत, हथियार और चालें—सब यहां आकर बेकार हो गईं।

इन किलों की कहानी आज भी हर भारतीय के दिल में
गर्व, साहस और आत्मसम्मान की आग जला देती है।

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