‘डिजिटल अरेस्ट’ का खौफनाक जाल! बुज़ुर्ग दंपती से 14 करोड़ की ठगी, गैंग में पुजारी से फाइनेंशियल एक्सपर्ट तक शामिल
कंबोडिया–नेपाल से जुड़े तार, म्यूल खातों से उड़ाई गई करोड़ों की रकम

लखनऊ। साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है। बुज़ुर्ग दंपती को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले गिरोह का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड में लखनऊ के दो लोगों समेत कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
विदेश तक फैला था ठगी का नेटवर्क
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के तार कंबोडिया और नेपाल तक जुड़े हुए हैं। ठगी की रकम को सीधे अपने खातों में न डालकर ये लोग उसे पहले ‘म्यूल’ बैंक खातों में ट्रांसफर कराते थे, जिससे पुलिस की नजर से बचा जा सके।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
पुलिस ने जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें—
वडोदरा निवासी दिव्यांग पटेल (30)
कृतिक शितोले (26)
भुवनेश्वर निवासी महावीर शर्मा उर्फ नील (27)
गुजरात निवासी अंकित मिश्रा उर्फ रॉबिन
वाराणसी निवासी अरुण तिवारी (45)
वाराणसी निवासी प्रद्युम्न तिवारी उर्फ एसपी तिवारी (44)
लखनऊ निवासी भूपेंद्र मिश्रा (37)
लखनऊ निवासी आदेश कुमार सिंह (36)
शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
गैंग में पुजारी की एंट्री, NGO की आड़ में खेल
इस केस में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरोह में वाराणसी का एक पुजारी भी शामिल निकला।
अरुण तिवारी, जिसे 16 जनवरी को गिरफ्तार किया गया, बीए पास है और वाराणसी में डेटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम करता था। वह ‘शिवाज चैरिटेबल फाउंडेशन’ नाम से एक NGO भी चलाता है।
प्रद्युम्न तिवारी, जिसे 20 जनवरी को पकड़ा गया, पेशे से पुजारी है और घाटों पर श्रद्धालुओं के लिए अनुष्ठान कराता था।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट भी निकला मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह में पढ़े-लिखे और प्रोफेशनल लोग भी शामिल थे।
दिव्यांग पटेल ने CA (इंटरमीडिएट) पास किया है और ‘तत्व बिजनेस एडवाइजर्स’ नाम से फाइनेंशियल सर्विस कंपनी चलाता था।
कृतिक शितोले के पास न्यूजीलैंड से IT डिप्लोमा है।
अंकित मिश्रा SBI कैप सिक्योरिटीज में सेल्स एग्जिक्यूटिव रह चुका है।
भूपेंद्र मिश्रा MBA डिग्रीधारी है, जबकि आदेश कुमार सिंह छात्रों को ट्यूशन पढ़ाता था।
डिजिटल अरेस्ट का डर, करोड़ों की लूट
आरोपियों ने बुज़ुर्ग दंपती को कानून कार्रवाई और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर मानसिक रूप से तोड़ा और धीरे-धीरे उनके खातों से करोड़ों रुपये निकलवा लिए।








