डेढ़ करोड़ की डिमांड… 70 लाख रंगे हाथ! IRS अफसर की ‘काली फाइल’ खुली, CBI ट्रैप में पूरा सिस्टम बेनकाब

GST चोरी दबाने के बदले रिश्वत का खेल, नए साल की पूर्व संध्या पर झांसी से दिल्ली तक हड़कंप—IRS प्रभा भंडारी और पूरा गिरोह CBI के शिकंजे में

New Delhi / Jhansi: नए साल की दस्तक से ठीक पहले देश की नौकरशाही को झकझोर देने वाला बड़ा खुलासा सामने आया है। उत्तर प्रदेश के झांसी से निकली इस सनसनीखेज़ कहानी में एक IRS अफसर पर ऐसा आरोप लगा है, जिसने पूरे विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वर्ष 2016 बैच की आईआरएस अधिकारी प्रभा भंडारी पर जीएसटी चोरी की फाइलें दबाने के बदले ₹1.5 करोड़ की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है।

सीबीआई (CBI) को जैसे ही पुख्ता सूचना मिली, एजेंसी ने पूरी प्लानिंग के साथ जाल बिछाया। डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के कथित निर्देश पर ₹70 लाख की पहली किस्त ली जा रही थी। इसी दौरान सीबीआई ने CGST झांसी में तैनात दो सुपरिंटेंडेंट—अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा—को रंगे हाथों धर दबोचा। इसके बाद कार्रवाई बिजली की रफ्तार से आगे बढ़ी।

 पूरा गिरोह आया सामने

सीबीआई ने इस मामले में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें—

  • IRS अधिकारी प्रभा भंडारी (2016 बैच)

  • CGST के दो सुपरिंटेंडेंट

  • नरेश कुमार गुप्ता, अधिवक्ता (बिचौलिये की भूमिका)

  • राजू मंगतानी, मैसर्स जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक (निजी व्यक्ति)
    शामिल हैं।

जांच में सामने आया है कि निजी फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए जीएसटी चोरी की फाइलें “रफा-दफा” की जा रही थीं और इसके बदले मोटी रकम वसूली जा रही थी।

 छापेमारी में निकला ‘कुबेर का खजाना’

गिरफ्तारी के बाद जब सीबीआई ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, तो जांच एजेंसी खुद भी चौंक गई।
अब तक की तलाशी में करीब ₹1.60 करोड़ नकद (ट्रैप मनी सहित) बरामद की जा चुकी है। इसके अलावा—

  • भारी मात्रा में सोने के आभूषण

  • सोने की ईंटें (बुलियन)

  • कई महंगी संपत्तियों के दस्तावेज
    भी हाथ लगे हैं। छापेमारी अभी जारी है, जिससे बरामदगी का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

 CBI का बड़ा खुलासा

सीबीआई का कहना है कि ट्रैप के दौरान पकड़े गए दोनों सुपरिंटेंडेंट रिश्वत की रकम डिप्टी कमिश्नर के निर्देश पर ले रहे थे। सभी आरोपियों को मेडिकल जांच के बाद अदालत में पेश किया जाएगा।

 फिर उठे भ्रष्टाचार पर सवाल

इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक अफसर की कहानी है, या सिस्टम के भीतर छिपी किसी बड़ी साजिश की झलक?

 जांच जारी है… और आने वाले दिनों में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।

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